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    Home»Breaking News»भाजपा सांसद ने तमिलनाडु में फंसे मजदूर से कहा : तुमलोग न बाहर जाकर कानून बतियाता है
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    भाजपा सांसद ने तमिलनाडु में फंसे मजदूर से कहा : तुमलोग न बाहर जाकर कानून बतियाता है

    azad sipahiBy azad sipahiMay 14, 2020Updated:May 14, 2020No Comments5 Mins Read
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    आजाद सिपाही संवाददाता
    रांची। पूरे देश में मजदूरों पर विपत्ति टूट पड़ी है। वापस अपने गांव लौटने और मदद के लिए वे हर दरवाजा खटखटा रहे हैं। परंतु चेन्नई में फंसे संथाल परगना के मजदूरों को मदद की इस गुहार के बदले में अपने सांसद से जो सुनना पड़ा, इससे उनके हौसले ही पस्त हो गये। दुमका के भाजपा सांसद सुनिल सोरेन का तमिलनाडु में फंसे मदद की गुहार लगाते एक मजदूर से बातचीत का आॅडियो वायरल हो रहा है। इसमें मजदूर को अपने सांसद से जो सुनना पड़ा, इससे उसकी परेशानी कम होने की बजाय और बढ ही गयी। आॅडियो में मजदूर सांसद से मदद की और झारखंड वापसी की गुहार लगाता सुनायी दे रहा है। निराश होने पर और सांसद द्वारा बार-बार आधा घंटा बाद बात करो की नसीहत पर वह सांसद से उलझ भी जाता है। इस सांसद नाराज होकर मजदूर से कहते हैं कि तुमलोग न बाहर जाकर खाली कानून बतियाता है। बड़ा कठिन आदमी है रे तुमलोग कुछो कुछो बकते रहता है। देखो, तुमलोग कानून मत बतियाओ। एक तो जगह जमीन रहते तुमलोग बाहर भागता है। तुमलोग को आना है तो आओ नहीं तो रहो। इसके बाद सांसद ने फोन रख दिया। यह वीडियो संथाल परगना से लेकर पूरे झारखंड में तेजी से वायरल हो रहा है।

    पेश है सांसद और मजदूर के बीच हुई बातचीत के मुख्य अंश
    सुनील सोरेन : बोलिए
    मजदूर : हां, प्रणाम सर

    सुनील सोरेन : क्या हुआ
    मजदूर : तमिलनाडु से बोल रहे हैं. कुछ हुआ कि नहीं हमलोग के लिए

    सुनील सोरेन : एगो नंबर देंगे जी, आधा घंटा बाद फोन करना
    मजदूर : सुनिए न, एगो बात बोले आपको। इ फोन लगा के आपको मोटा मोटी छह बार फोन कर चुके हैं।

    सुनील सोरेन : हां तो
    मजदूर : आप हर बार बोलते हैं आधा घंटा बाद फोन करो और जब आधा घंटा बाद फोन करते हैं तो आपका फोन स्वीच आॅफ बताता है।

    सुनील सोरेन : हां तो हमीं तुमको आंध्र प्रदेश भेजे हैं क्या?
    मजदूर : नहीं..नहीं आपसे कुछ होगा सो।

    सुनील सोरेन : बकवास करते हो
    मजदूर : एक मिनट रूकिए आप, हमलोग जो आपको सांसद महोदय चुने हैं वो कौन दिन के लिए चुने हैं।

    सुनील सोरेन : कौन दिन के लिए चुने हैं सो छोड़िए। ट्रेन का व्यवस्था है ट्रेन का टिकट कटाइए। क्या मदद करेंगे जी हम।
    मजदूर : निशिकांत जी को देखिए।

    सुनील सोरेन : निशिकांत दुबे तीन मर्तबे जीते हैं, हम कितने बार जीते हैं।
    मजदूर : ठीक है सर, हमलोग आपको जिताने के लिए एड़ी चोटी लगा दिये।

    सुनील सोरेन : आपलोगों का व्यवस्था नहीं होगा तब न। ट्रेन का व्यवस्था है टिकट कटाइए और आइए।
    मजदूर : कहां टिकट का व्यवस्था है तमिलनाडु में। कहां टिकट कटाएं हम।

    सुनील सोरेन : ट्रेन का व्यवस्था हुआ है। आप टिकट कटाइए तो।
    मजदूर : हम उस दिन भी बोले की खाने-पीने का दिक्कत हो रहा है। आप बोले कि एक नंबर देते हैं। नंबर में फोन किये तो लगता नहीं है। छह बार तो फोन कर चुके हैं।

    सुनील सोरेन : देखिए स्पष्ट बात। हम न तो पैसा दे सकते हैं। हम वहीं उपलब्ध करा सकते हैं, जो प्रशासन से मिल रहा है। हम करोड़पति घर का बेटा नहीं हैं।
    मजदूर : ओतना ही दिलाइए। हम जान रहे हैं, आपके हाथ में पावर है। कम से कम परमिशन तो दिलाइए।

    सुनील सोरेन : आपको मालूम होना चाहिए कि यहां स्टेट में यहां जेएमएम का सरकार है।
    मजदूर : हम वो नहीं बोल रहे हैं. हमलोग एक बस किये हैं। अपना पैसा देके।

    सुनील सोरेन : आपलोग जो कर रहे हैं करिए।
    मजदूर : हमलोग जो बस किये हैं उसका उधर से पास दिला सकते हैं। बस वाला पास मांग रहा है।

    सुनील सोरेन : हम कौन सा पास दिलायेंगे।
    मजदूर : बस वाला बोल रहा है कि झारखंड से ई-पास चाहिए। उ पास कैसे बनेगा हमलोग को नहीं न पता है सर। पास के बारे आपही न बताइयेगा सर।

    सुनील सोरेन : तुमलोग न बाहर जा के कानून बतियाता है खाली। ऐसा भाषा में कोइ नहीं मदद करेगा तुमलोग का।
    मजदूर : आप मदद कैसे नहीं किजिएगा, पंद्रह बार फोन करेंगे। मदद कैसे नहीं कीजिएगा। आप गजब बात है।

    सुनील सोरेन : कठिन आदमी है तुमलोग रे, कुछो कुछो बकते रहता है।
    मजदूर : बकेंगे नहीं सर, आपको छह मर्तबा फोन कर चुके हैं आधा घंटा में। कौन सा नंबर आप दीजिएगा आप ही को पता नहीं। फिर आधा घंटा बाद आपको फोन करते हैं, तो आपका नंबर स्वीच आॅफ बताता है।

    सुनील सोरेन : आप जिस नंबर पर फोन करते हैं वो मुख्यमंत्री के यहां उठाते हैं। वो सुनता नहीं है तो हम क्या करें।

    मजदूर : दुमका लोकसभा के सांसद हैं आप।

    सुनील सोरेन : सांसद हैं तो का हुआ। यहां स्टेट गर्वमेंट दूसरे का है।
    मजदूर : हम सब समझते हैं सर लेकिन आपकी ओर से कोई मदद होगा की नहीं होगा, मैं ये पूछ रहा हूं।

    सुनील सोरेन : हमरे स्तर से क्या व्यवस्था होगा बताइए। आपका ट्रेन चलिए रहा है आइए।
    मजदूर : मतलब दुमका लोकसभा की जनता के ऊपर आपका कोई जवाबदेही नहीं है।

    सुनील सोरेन : देखो, तुमलोग कानून मत बतियाओ। एकतो जगह जमीन रहते तुमलोग बाहर भागता है। तुमलोग को आना है तो आओ नहीं तो रहो।
    मजदूर : क्या बतियाए। कैसे आयें।

    नोट : ये वायरल वीडियो है और आजाद सिपाही इसकी पुष्टी नहीं करता है। इसकी पुष्टि के लिए सांसद सुनील सोरेन से उनके मोबाइल नंबर …. पर संवाददता ने बार-बार संपर्क करने की कोशिश की, पर उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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