- रोजगार सृजन के लिए आंतरिक क्षमता का होगा पूरा इस्तेमाल
- सीएम की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक
रांची। सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि प्रवासी मजदूरों और छात्रों की झारखंड वापसी का सिलसिला शुरू हो चुका है। यह तब तक जारी रहेगा, जब तक लॉकडाउन की वजह से फंसे सभी लोगों को वापस नहीं लेकर नहीं आते हैं। मुख्यमंत्री ने आवास में मंत्रिमंडल की उपसमिति और पदाधिकारियों के साथ बैठक में कोरोना संक्रमण को लेकर हो रहे बदलाव को लेकर बनायी जा रही कार्ययोजना की जानकारी देने के साथ मंत्रियों से सुझाव भी लिये। वहीं पदाधिकारियों से इससे निपटने की दिशा में किये जा रहे कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोटा से भी फंसे छात्रों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। वहीं अन्य राज्यों में फंसे विद्यार्थियों और वेल्लोर समेत दूसरे राज्यों के अस्पतालों में इलाज कराने गये झारखंड के मरीजों को लाने की दिशा में भी सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है।
उद्योग-धंधे से 75 फीसदी को रोजगार
मुख्यमंत्री ने कहा कि लाखों प्रवासी मजदूरों की वापसी के बाद चुनौतियां बढ़ेंगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए अलग-अलग वृहद कार्ययोजना बनायी जा रही है। राज्य के सभी उद्योग-धंधों का आंकलन किया जा रहा है। इन उद्योग धंधों में लगभग 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देना सुनिश्चित करने के लिए सरकार कदम उठायेगी।
मनरेगा का बढ़ेगा बजट, सभी को जॉब कार्ड
मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में मजदूरों के वापस लौटने पर उनके सामने रोजगार सबसे बड़ी समस्या होगी। इसके तहत मनरेगा का बजट बढ़ाया जायेगा। इसमें नयी योजनाओं को शामिल किया जायेगा और मनरेगा मजदूरी दर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र भेजा जायेगा।
निजी अस्पताल नहीं खुले, तो निबंधन रद्द
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरी बीमारियों से ग्रसित मरीजों के इलाज को लेकर टेलीमेडिसीन की सुविधा शुरू की जा रही है। इ-संजीवनी की शुरूआत भी हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने बताया कि अभी भी ज्यादा निजी अस्पताल और नर्सिंग होम बंद हैं। इस बाबत निजी अस्पताल के संचालकों को चेतावनी दी गयी है कि वे अपने अस्पताल को खोलें, वरना उनका निबंधन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी।
हवाई जहाज से भी फंसे लोगों को लाने पर विचार
मुख्यमंत्री को मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने बताया कि मजदूरों को चरणबद्ध तरीके से लाने की कार्य योजना तैयार कर ली गयी है। पहले चरण में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओड़िसा, छत्तीसगढ़ ओर मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों से मजदूरों को बस से वापस लाया जायेगा। यहां लगभग 34 हजार झारखंड के मजदूर फंसे हुए हैं। इनकी पूरी सूची तैयार कर ली गयी है। जहां कम संख्या में लोग फंसे हैं, उन्हें हवाई जहाज से लाने पर भी सरकार विचार कर रही है। बताया कि अंतरराज्यीय और अंतर जिला आवागमन को लेकर भी संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश दे दिये गये हैं। इसके अंतर्गत जो लोग अपने वाहन से आना चाहेंगे, उन्हें संबंधित जिलों के उपायुक्त द्वारा पास निर्गत किया जायेगा।
इनकी रही मौजूदगी
मंत्री रामेश्वर उरांव, चंपाई सोरेन, बन्ना गुप्ता और सत्यानंद भोक्ता के अलावा मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ नीतिन मदन कुलकर्णी और प्रधान सचिव अविनाश कुमार मौजूद थे।