अजय शर्मा
रांची। बड़कागांव थाना हाजत से थाना से फरार शूटर अमन साव को किसने भगाया, इसकी जांच सीआइडी करेगी। साथ ही, भगानेवाले पुलिस अधिकारियों को भी चिह्नित करने की जवाबदेही सीआइडी को सौंपी गयी है। सरकार के स्तर से जांच के आदेश दिये गये हैं। जांच के बाद इस संबंध में एक रिपोर्ट भी सीआइडी तैयार करेगी। अमन साव के थाना हाजत से फरार होने के मामले को आजाद सिपाही ने 12 मई को प्रमुखता से एक खबर प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था-शूटर अमन साव को भगाने के लिए पुलिस ने लिये थे ढाई करोड़। इस मामले में एक भाजपा नेता का नाम भी उभरा है। उसकी भूमिका की भी जांच होगी।
क्या है मामला
शूटर को 24 सिंतबर 2019 को रामगढ़ जेल गेट से गिरफ्तार किया गया था। उसे बड़कागांव थाना में रखा गया। 28 सितंबर को फिल्मी अंदाज में वह भाग गया था। भाजपा का एक नेता जो बड़कागांव विधानसभा से दावेदारी पेश कर रहा था, वह अमन साव को खाना पहुंचाने जाया करता था। उसे सभी पुलिसकर्मी जानते थे। पुलिस चाह रही थी कि उरीमारी इलाके में झामुमो नेता की हत्या में उससे कुछ राज उगलवाया जाये। इस बीच भाजपा नेता ने सीनियर पुलिस अधिकारी से संपर्क साध कर उसे भगवाने में सफल रहा। इस एवज में मोटी रकम का भुगतान भी किया गया है। पहुंच इतनी थी कि उस समय के थानेदार मुकेश कुमार निलंबित भी हुए और कुछ ही दिन बाद उनका निलंबन वापस भी हो गया।
भाजपा नेता को क्या था फायदा
भाजपा नेता विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे। उन्होंने इसकी घोषणा भी कर रखी थी। नेता के रूप में वह खुद को स्थापित करने का प्रयास कर रहा था। अमन साव से उसकी पहले से दोस्ती है। वह चाहता था कि अमन जेल में नहीं रहे, कम से कम चुनाव तक बाहर रहे, ताकि कोयलांचल इलाके भुरकुंडा, सयाल, उरीमारी, पतरातू में उसके प्रभाव का फायदा मिल पाये। इसके बाद ही सीनियर पुलिस अधिकारियों से संपर्क साध कर वह अपने मकसद में कामयाब रहा।
गठित हुई थी टीम
अमन साव को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की एक टीम भी गठित की गयी थी। पुलिस टीम अमन तक पहुंच गयी थी, लेकिन तब तक पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर टीम को वापस कर लिया गया और फिर अमन गिरफ्तार नहीं हुआ। इन सब बिंदुओं पर बारीकी से जांच अब सीआइडी करेगी।