उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पंचायत चुनाव की मतगणना में धांधली को लेकर सियासत तेज हो गई है. एटा के कलेक्ट्रेट ऑफिस पर जनपद एटा के चारों विधायक, चुनाव प्रभारी, जिला अध्यक्ष सहित जिले के बीजेपी नेता धरने पर बैठ गए हैं. सत्ता पक्ष के आक्रोशित नेता और एमएलए ने जिला प्रशासन पर विपक्ष के साथ सांठगांठ कर बीजेपी के प्रत्याशियों को साजिश के तहत हराने का आरोप लगाया है.
एटा डीएम ने धरने पर बैठे आक्रोशित सत्ता पक्ष के नेताओं और विधायकों को काफी समझाने का प्रयास किया लेकिन आक्रोशित नेता अपनी बात को लेकर जिद पर अड़े रहे. नेताओं का कहना है कि जब तक उनको न्याय नहीं मिलेगा वे धरने से नहीं उठेंगे. धरने पर बैठे नेताओं ने जिला प्रशासन के विरोध में जबरदस्त नारेबाजी भी की. सत्ता पक्ष के नेताओं का आक्रोश देखते हुए जिला कलेक्ट्रेट परिसर को छावनी बना दिया गया है और पुलिस बल पूरी सतर्कता के साथ निगाह बनाए हुए है. फिलहाल अभी तक बीजेपी के नेता और विधायक जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरने पर बैठे हुए है.
धरने पर बैठे जिला चुनाव प्रभारी और एमएलसी धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि, ” काउंटिंग शुरू होने के बाद में जैसे-जैसे काउंटिंग आगे बढ़ी हमारे कार्यकर्ताओं के फोन आने लगे कि हमारे एजेंटों को बाहर कर दिया गया और 2 घंटे बाद बुलाया गया. हमारे प्रत्याशी 900 वोट से हजार वोट से 12 सौ वोट से जीत रहा था और 2 घंटे के अंदर 2000 से पीछे कर दिया गया. हमने यह जानकारी संबंधित लोगों को दी लेकिन इस बात को गंभीरता से नहीं लिया गया. उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने कर्मचारियों को सही साबित करने के लिए हम लोगों से कहा कि आपके पास फर्जी जानकारी आ गई है.”
उन्होंने कहा कि ”हम 27 वार्डों की रिकाउंटिंग चाहते हैं. यहां के जो प्रशासनिक अधिकारी हैं. इन पर हमको कोई भरोसा नहीं है. यहां समाजवादी पार्टी को फायदा पहुंचाया गया है. हम से बात हुई तो उन्होंने हमसे कहा अभी बैलेंस शीट नहीं आई है. हम देखेंगे और जानकारी देंगे. इसके बावजूद इन्होंने उन लोगों को बुला लिया गया और 11:00 बजे से प्रमाण पत्र देना शुरू कर दिया.”