रांची। झारखंड सरकार के मंत्री आलमगीर आलम के करोड़पति सरकारी सचिव संजीव लाल और उसके सहयोगी जहांगीर की गिरफ्तारी के बाद एक नया नाम काफी चर्चा में है। यह नाम है छोटू उर्फ गजनफर का। इस नाम की चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि आलमगीर के यहां सहायक के पद पर कार्यरत छोटू की मर्जी के बिना आप मंत्री जी से मिल भी नहीं सकते।

करीब एक दशक से छोटू मंत्री जी के साथ साये की तरह है। छोटू तब भी आलमगीर आलम के साथ था, जब वह पावर में नहीं थे। छोटू का घर वैसे तो रांची में ही है। लेकिन पाकुड़ में भी उसने अच्छी पैठ बना ली है। मंत्री जी से मिलना हो, उनसे कोई काम हो तो इसका पूरा ब्यौरा आपको सबसे पहले छोटू को देना होगा। छोटू चाहेगा तभी आपका काम होगा। लोग बताते हैं कि मंत्री जी भी छोटू पर आंख मूंद कर भरोसा करते हैं।

किसी भी पैरवी के लिए अधिकारीयों को छोटू का ही फोन जाता है। इससे पहले छोटू पूर्व मंत्री बंधू तिर्की का भी सहयोगी रह चुका है। पार्टी के सेकेंड लाइन के नेता और कार्यकर्त्ता छोटू के आगे नतमस्तक रहते हैं। छोटू उर्फ गजनफर इमाम भी इडी की रडार पर है।

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