नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदर्श जीवन मूल्यों और शास्त्रों पर आधारित आचरण के महत्व पर बल देते हुए कहा कि सुव्यवस्थित मानकों से निर्देशित मानवीय व्यवहार व्यक्ति और समाज दोनों को प्रकाशमान करता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए लिखा –

“तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ।

ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि।।”

इस श्लोक का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को यह तय करने के लिए कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं, शास्त्रों को मार्गदर्शक मानना चाहिए। शास्त्रों में बताए गए नियमों और सिद्धांतों को समझकर ही मनुष्य को अपने कर्म करने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि धार्मिक और नैतिक आचरण एक दीपक की तरह होता है, जो केवल व्यक्ति के जीवन को ही नहीं बल्कि पूरे समाज को भी दिशा और प्रकाश प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति स्थापित मूल्यों और आदर्शों के अनुसार जीवन जीता है, तब उसका आचरण संतुलित, स्वीकार्य और समाज के लिए उपयोगी बनता है।

उन्होंने कहा कि आज देशवासी संयम, दृढ़ता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह भारतीय जीवन मूल्यों और आदर्श आचरण का जीवंत उदाहरण है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि श्रेष्ठ आचरण वही है, जो व्यक्ति के साथ-साथ पूरे समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करे। उन्होंने देशवासियों से नैतिक मूल्यों और कर्तव्यपरायणता को जीवन का आधार बनाने का आह्वान भी किया।

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