गुवाहाटी। असम विधानसभा के मौजूदा सत्र के तीसरे दिन सोमवार को सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 सदन में पेश कर दिया। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की अनुपस्थिति में संसदीय कार्य मंत्री Atul Bora ने विधानसभा में बिल प्रस्तुत किया। विधेयक पेश होते ही विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया और अध्यक्ष से इसे सदन में पेश नहीं करने की मांग की।
सरकार का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने से जुड़े कानूनों को एक समान बनाना है। प्रस्तावित कानून में शादी की न्यूनतम उम्र तय करने, बहुविवाह पर रोक, बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी दायरे में लाने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यूसीसी असम के लिए समय की जरूरत है और यह संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना को मजबूत करेगा। वहीं सरकार ने साफ किया है कि अनुसूचित जनजाति (पहाड़ी और मैदानी) समुदायों तथा पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों को इस कानून से बाहर रखा जाएगा।
यदि यह विधेयक पारित होता है, तो उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम यूसीसी लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन जाएगा। विधानसभा में इस पर विस्तृत चर्चा मंगलवार को होने की संभावना है, जबकि 27 मई को इसे पारित किया जा सकता है।



