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    Home»Jharkhand Top News»जालसाजी से जुड़े मामले में  उमेश साहू और विनय शर्मा साक्ष्य के अभाव में रिहा
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    जालसाजी से जुड़े मामले में  उमेश साहू और विनय शर्मा साक्ष्य के अभाव में रिहा

    shivam kumarBy shivam kumarMay 30, 2026Updated:May 30, 2026No Comments3 Mins Read
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    पूर्वी सिंहभूम। लगभग 15 वर्ष पुराने एक न्यायिक मामले में शनिवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी सीमा मिज की अदालत ने साकची निवासी उमेश साहू और मानगो निवासी विनय शर्मा को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया है। न्यायालय ने पाया कि शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य और गवाही प्रस्तुत नहीं की गई, जिसके कारण अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा। मामले की शुरुआत वर्ष 2011 में हुई थी, जब साकची निवासी गीतनंदन वार्ष्णेय ने न्यायालय में एक शिकायतवाद दायर किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक पूर्व दर्ज मामले में करीब आठ लाख रुपये के कथित गबन और धोखाधड़ी से जुड़े प्रकरण में उमेश साहू और विनय शर्मा ने झारखंड उच्च न्यायालय से जमानत प्राप्त करने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया था। इसी आधार पर उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं, जिनमें झूठे साक्ष्य, मिथ्या घोषणा, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग से संबंधित धाराएं शामिल थीं, के तहत मामला दर्ज कराया गया था।

    न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। हालांकि, लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता आरोपों को पुष्ट करने के लिए आवश्यक प्रमाण उपलब्ध नहीं करा सके। अदालत ने पाया कि प्रस्तुत रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू और बबिता जैन ने अदालत में विस्तृत दलीलें पेश कीं। उन्होंने न्यायालय के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 245 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 268 के प्रावधानों का हवाला देते हुए आरोपमुक्त करने का आवेदन दाखिल किया।

    बचाव पक्ष का तर्क था कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, इसलिए अभियुक्तों के विरुद्ध मुकदमे को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं बनता। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने माना कि आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं हैं। इसके बाद अदालत ने उमेश साहू और विनय शर्मा को आरोपों से मुक्त करने का आदेश पारित किया। न्यायालय के इस फैसले के साथ वर्ष 2011 से लंबित यह मामला समाप्त हो गया। फैसले के बाद बचाव पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि अदालत ने तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय दिया है।

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