नई दिल्ली/श्रीनगर:  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे वित्तपोषण के संबंध में श्रीनगर, दिल्ली और हरियाणा में की गई लगभग दो दर्जन छापेमारी में एक करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं। एनआईए अधिकारियों ने बताया कि ये छापेमारी श्रीनगर में 14, दिल्ली में आठ और हरियाणा में एक जगह की गई। दिल्ली में बल्लीमारान और चांदनी चौक में और हरियाणा के एक कोल्ट स्टोरेज में छापेमारी हुई।

अधिकारी ने बताया कि जितनी धनराशि जब्त की गई है, उसमें से 65-70 लाख रुपये श्रीनगर से और 35-40 लाख रुपये दिल्ली से जब्त किए गए हैं।

यह छापेमारी तीन अलगाववादी नेताओं तहरीक-ए-हुर्रियत नेता गाजी जावेद बाबा, जम्मू एंड कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) नेता फारुख अहमद डार उर्फ बिट्टा कराते और हुर्रियत नेता नईम खान के ठिकानों पर की गई।

इंडिया टुडे चैनल पर प्रचारित वीडियो में इन तीनों ने कश्मीर में तनाव बढ़ाने के लिए पाकिस्तान से धन लेने की बात स्वीकार कर ली है।

यह छापेमारी हुर्रियत अध्यक्ष सैयद अली गिलानी और उनके साथी हुर्रियत प्रांतीय अध्यक्ष नईम खान, डार और बाबा के खिलाफ 19 मई को प्राथमिक जांच के मद्देनजर की गई।

अलगाववादी नेता ने एक स्टिंग ऑपरेशन में यह स्वीकार किया है कि उन्होंने बल्लीमारान और चांदनी चौक के बिचौलियों के जरिए पाकिस्तान से पैसा लिया है।

छापेमारी दिल्ली के रोहिणी और ग्रेटर कैलाश 2 में भी की गई।

एक वरिष्ठ एनआईए अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, एलईटी प्रमुख हाफिज सईद और पाकिस्तान स्थित अन्य आतंकवादी संगठनों के खिलाफ प्राथमिक जांच को प्राथमिकी में तब्दील किया गया है।

हालांकि, इस एफआईआर में किसी भी अलगाववादी नेता का नाम नहीं है।

इंडिया टुडे के 16 मई को दिखाए स्टिंग ऑपरेशन में अलगाववादी नेता को कथित तौर पर एक रिपोर्टर को यह बताते हुए देखा जा सकता है कि उन्होंने हवाला के जरिए पाकिस्तान से पैसा लिया है।

एनआईए ने पूछताछ के लिए इन तीनों को पहले दिल्ली भी बुलाया था।

एनआईए ने घाटी में स्कूलों और सार्वजनिक संपत्तियों को आग लगाने की घटनाओं के लिए 19 मई से 22 मई के बीच श्रीनगर में लगातार चार दिन बाबा और डार से पूछताछ की।

एनआईए ने 20 मई को 13 आरोपियों की जानकारियां इकट्ठा की थी और कश्मीर में स्कूलों और सार्वजनिक संपत्तियों में आगजनी करने वालों के खिलाफ आरोपपत्र भी दायर किया था।

एनआईए अधिकारियों का कहना है कि वह लश्कर-ए-तैयबा और अन्य स्रोतों से अलगाववादी नेताओं को मिले वित्त की जांच कर रही है। आठ जुलाई 2016 को मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी को मार गिराए जाने के बाद घाटी में तनाव बढ़ाने के लिए भी इस वित्त के इस्तेमाल की जांच की जा रही है।

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