रतलाम। आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कोरोना की आड़ में रेलकर्मियों के महंगाई भत्ते रोक रही है। ऐसे में कर्मचारियों के सामने खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
फेडेरेशन के प्रवक्ता ने गुरुवार को बताया कि रेलकर्मियों ने केंद्र सरकार द्वारा महंगाई भत्ता रोकने के खिलाफ 6 से 8 जून तक देशव्यापी जन-जागरण अभियान चलाया, इसके बाद 8 जून को विरोध दिवस भी मनाया, फिर भी केंद्र सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। रेलकर्मी महंगाई भत्ते की बहाली के लिए किसी भी स्तर का विरोध करने के लिए तैयार है। सरकार कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा न ले।
प्रवक्ता ने बताया कि  देशव्यापी विरोध में 9 लाख से अधिक रेलकर्मियों ने हिस्सा लिया था। केंद्र सरकार द्वारा रेलकर्मियों की अनदेखी ऐसे संकट के समय ठीक नहीं है। तालाबंदी के समय रेलकर्मियों ने दिन-रात पूरी मेहनत की, उनकी मेहनत से ही श्रमिक स्पेशल ट्रेने, पार्सल ट्रेनों और मालगाडिय़ों का बराबर संचालन हुआ। रेलवे स्टेशन, पावर केबिन और कंट्रोल रूम में कोरोना संक्रमण को देखते हुए भी रेलकर्मियों ने ड्यूटी की है। सरकार चाहे एक ट्रेन चलाए या 200 ट्रेने रेलकर्मचारियों को ड्यूटी उतने ही घंटे करनी है।
ज्ञातव्य है कि केंद्र सरकार ने रेलकर्मचारियों का महंगाई भत्ता  कोरोना संक्रमण के चलते रोक दिया है, जबकि सभी रेलकर्मचारियों ने कोरोना से निपटने के लिए अपना एक दिन का वेतन राहत कोष में प्रदान किया है। महंगाई भत्ता रोके जाने के खिलाफ कर्मचारियों में काफी नाराजगी है, आगे भी कर्मचारियों का विरोध जारी रहेगा।
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