जिस राज्य में गृह सचिव से लेकर डीजीपी तक के पद प्रभारी अधिकारियों के जिम्मे होंगे वहां दुरुस्त लॉ एंड आर्डर की कल्पना बेमानी
आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य में बढ़ती उग्रवादी घटनाओं पर चिंता जतायी है। उन्होंने कहा कि राज्य में नई सरकार के गठन से आज तक 41 छोटी-बड़ी उग्रवादी घटनाएं हो चुकी हैं। बुधवार को लोहरदगा में उग्रवादियों ने आतंक मचाते हुए पंद्रह वाहनों को फूंक दिया और वहां कार्यरत कर्मियों के साथ मारपीट की। कोरोना संकट काज में छह से अधिक बार सीधे तौर पर पुलिस के साथ या उसकी मौजूदगी में घटित घटनाओं से भद्द पिटी है। इन घटनाओं से पुलिस की कार्य क्षमता के साथ राज्य सरकार की साख पर भी बट्टा लगा है।
कहीं बंधक बनी और कहीं पिटाती रही
बाबूलाल ने कहा कि कोरोना ड्यूटी के दौरान राज्य पुलिस की लाचारी ऐसी रही कि कहीं वह बंधक बनी तो कहीं पिटाती रही। राज्य पुलिस को अपनी जो किरकिरी करानी थी वह तो उसने करायी ही केंद्रीय जवानों की भद्द पिटवाने से भी बाज नहीं आयी। कोरोना योद्धाओं पर थूका गया और उन्हें पीटा गया। रजिस्टर फाड़े गये पर पुलिस की तत्परता को तो जैसे जंग लग गया। इनके विपरीत छोटे-छोटे मामलों में पुलिस की तत्परता अभूतपूर्व रही। सरकार और शासकों के संबंध में सोशल मीडिया पर मामूली टीका-टिप्पणी करने के आरोप में एक वर्ग विशेष के लोगों को जेल भेजने में पुलिस की सक्रियता देखने लायक थी। पुलिस की अक्षमता और मनमानी के पीछे राज्य की पूरी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के सर्वोच्च पदों को प्रभारी अधिकारियों के सहारे चलाया जाना इसका प्रमुख कारण रहा। जिस राज्य में गृह सचिव से लेकर डीजीपी तक के पद प्रभारी अधिकारियों के जिम्मे होंगे वहां दुरुस्त लॉ एंड आॅर्डर की कल्पना भी बेमानी है। क्या राज्य में काबिल और सक्षम अधिकारियों का टोटा हो गया है। यदि ऐसा नहीं है तो सरकार को ऐसे सर्वाधिक महत्वपूर्ण पदों पर अफसरों की तैनाती का फैसला लेने से कौन रोक रहा है। यदि कोई नहीं रोक रहा तो फिर यह अस्थायी और प्रभारी अधिकारियों की तैनाती क्यों। यह दुखद है कि राज्य सरकार इतने दिनों के बाद भी एक एक डीजीपी और होम सेक्रेटरी नहीं खोज पायी है। सरकार किसे डीजीपी और होम सेक्रेटरी बनाती है यह तो सरकार का विशेषाधिकार है पर ऐसे महत्वपूर्ण पदों को प्रभार वाले अधिकारियों के भरोसे चलाया जाना राज्यहित में नहीं है। होम सेक्रेटरी और डीजीपी के पद कुछ दिनों के लिए प्रभार में रखे जा सकते हैं न कि महीनों-महीने के लिए। राज्य में उग्रवादी एक बार फिर अपनी पकड़ बना रहे हैं ऐसे में सरकार को इस दिशा में त्वरित कदम उठाना चाहिए।