अजय झा
दुमका। एनजीटी कानून लागू हो या सरकार का सख्त नियम हो, इन बालू माफिया को इनसे कोई लेना देना नहीं। इनका एक मात्र मिशन होता है, नदियों से बालू खोदो, असली नकली चालान दो और जैसे भी हो बेचकर लाखों कमाओ। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो ये माफिया हर दिन करीब 50 लाख के राजस्व का चूना सरकार के खजाने को लगा रहे हैं। दुमका जिले में हर बालू घाट पर झारखंड के एक बड़े शराब माफिया का कब्जा है। कुछ स्थानीय गुर्गों को यहां साथ लेकर जमकर बालू उठाव, डंपिंग और लोडिंग कर रहे हैं। देवघर में कल शनिवार को ही टास्क फोर्स ने कई ट्रैक्टर और ट्रकों को जब्त किया है। यहां बता दें कि आज की तारीख में अगर एक ट्रैक्टर बालू भी कहीं दिख जाये तो वो वैध नहीं हो सकता। क्योंकि देश में हरित प्राधिकरण कानून यानी एनजीटी एक्ट लागू है। इस कानून के तहत ना तो बालू का उठाव हो सकता है न डंपिंग न ट्रांसपोर्टिंग। लेकिन इन माफिया की हिमाकत तो देखिये रात तो रात दिन दहाड़े ट्रैक्टरों से बालू डंपिंग कर रहे और ट्रकों से बालू दूसरे राज्य भेज रहे। इन्हें रोकने वाला कोई नहीं। दिन भर सड़कों पर ट्रैक्टर दनादन दौड़ते रहते हैं और रात भर बालू भरे ट्रकों का रेला।
लाखों के राजस्व का नुकसान
अगर आंकड़ों पर गौर करें तो दिन रात बालू के अवैध धंधे से लाखों के रेवेन्यू का नुकसान सरकार को दिया जा रहा। बता दें कि एक ट्रक में 10 ट्रैक्टर बालू लोड किया जाता है यानी कि 1000 सेप्टिक बालू। 100 सेप्टिक बालू से सरकार को 374 रुपये रेवेन्यू आता है। अगर 14 परसेंट जीएसटी मिला दें तो करीब 426 रुपये एक ट्रैक्टर बालू का रेवेन्यू हुआ। ऐसे में एक ट्रक बालू का रेवेन्यू 4260 रुपये जो सीधे से सरकार के खाते में जाना है। लेकिन यहां कहानी कुछ और ही है। सरकार को नहीं जाकर लाखों का रेवेन्यू माफिया, अफसर और गुर्गों के पॉकेट में जा रहा है।
पुलिस करती है नजरअंदाज
पुलिस के सामने से अवैध बालू लदा ट्रक गुजरता है लेकिन उसे नजरअंदाज कर देती है। दिन भर ट्रैक्टरों पर बालू ढोया जाता है कभी खनन विभाग देखने भी नहीं आता। जब इस संबंध में खनन पदाधिकारी से बात करने की कोशिश की गयी तो उनका नंबर अनरीचेबल आया।

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