जम्मू हवाई अड्डे के टेक्निकल एरिया यानी एयरफोर्स स्टेशन पर रविवार को ड्रोन से किये गए हमले ने सुरक्षा एजेंसियों को चिंता में डाल दिया है। हालांकि जांच अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को एयर बेस के काफी करीब से ही ड्रोन को लॉन्च किये जाने का संदेह है। दरअसल, इस्तेमाल में लाए गए ड्रोन काफी छोटे थे जो कहीं दूर से नहीं आ सकते हैं। घटना के सबूत जुटाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और स्पेशल फोर्स की टीम अभी भी वायुसेना स्टेशन पर मौजूद है।
इस ड्रोन हमले में इस्तेमाल किए गए बमों का विश्लेषण करने और सबूत जुटाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) से बम डाटा सेंटर की एक टीम विस्फोट स्थल पर पहुंची है। साथ ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम भी पूरे मामले की आतंकी एंगल से जांच कर रही है। सभी सुरक्षा एजेंसियां घटनास्थल की व्यापक तलाशी के बाद अलग-अलग एंगल से जांच कर रही है। नियंत्रण रेखा (एलओसी) के अग्रिम मोर्चों पर तैनात बॉर्डर सिक्युरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ) ने जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की है। जम्मू-कश्मीर के शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो, एनएसजी, वायु सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ के साथ तत्काल बैठक करके और ड्रोन हमले की आशंका के चलते जवाबी उपायों पर चर्चा की।
जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने साफ कहा कि साजिश भले ही सीमा पार से की गई हो लेकिन इसे अंजाम देने वाले सीमा के भीतर मौजूद थे। आशंका है कि ड्रोन को हमले वाली जगह के पास के लोग चला रहे थे। दोनों धमाकों को जम्मू हवाई अड्डे के तकनीकी क्षेत्र पर लक्षित किया गया था, यानी वह क्षेत्र जहां नागरिक और सैन्य दोनों विमान खड़े हैं। यह धमाका इतना जोरदार था कि इसकी आवाज एक किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। इस हमले के फौरन बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जम्मू के त्रिकुटा नगर थाना क्षेत्र के एक शॉपिंग मॉल के पास से एक संदिग्ध आतंकी और ओवर ग्राउंड वर्कर को गिरफ्तार किया जिनके पास से पांच किलोग्राम का आईईडी भी बरामद किया गया है। हालांकि अभी तक गिरफ्तार आतंकियों और इस हमले के बीच संबंधों का खुलासा नहीं किया गया है।
भारतीय वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया इस समय आधिकारिक निमंत्रण पर बांग्लादेश में हैं, लेकिन लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और हर हालात पर नजर बनाए हुए हैं। ड्रोन के इस हमले में मामूली रूप से घायल हुए वायु सेना के दो जवानों वारंट अधिकारी अरविंद सिंह और एयरमैन एसके सिंह से एयरचीफ मार्शल ने बांग्लादेश से फोन करके बात की है। दोनों जवान प्राथमिक उपचार के बाद ठीक और वायुसेना की निगरानी में हैं। वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि घटना की जांच के लिए जमीनी स्तर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। वायुसेना प्रमुख की गैर मौजूदगी में पश्चिमी वायु कमांडर एयर मार्शल वीआर चौधरी मैदान इस पूरे मामले की कमान संभाले हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में अभी तक एक बात साफ हुई है कि इस ड्रोन हमले का निशाना एयर फोर्स स्टेशन पर खड़े विमान थे जो सफल नहीं रहा। इस हवाई अड्डे पर कई राडार और वायु रक्षा प्रणालियां भी हैं जो इस हमले के लिए एक बड़ा लक्ष्य हो सकती थीं क्योंकि इन पर कई सौ करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इस विस्फोट के तुरंत बाद भारतीय सेना के पैरा कमांडोज, जम्मू पुलिस, आईबी और रॉ के वरिष्ठ अधिकारी जांच के लिए जम्मू हवाई अड्डे पर पहुंचे। साथ ही सुरक्षाबलों ने मिनटों में पूरे इलाके को सील कर दिया। इस धमाके के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पूरे जम्मू इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया। साथ ही अम्बाला, पठानकोट और अवंतिपुरा एयरबेस को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।
आखिर भारतीय वायु सेना इस हमले का पता क्यों नहीं लगा पाई
दरअसल ड्रोन बहुत छोटे होते हैं और उनमें राडार के सिग्नेचर नगण्य होते हैं जिसके कारण सामान्य राडार आसानी से उनका पता नहीं लगा पाते हैं। इसीलिए भारतीय वायुसेना का आकाश एयर डिफेंस सिस्टम इन ड्रोन को निशाना नहीं बना सका। जानकारों का कहना है कि ड्रोन हमलों को हराने के लिए नई पीढ़ी के एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत होती है जिसे काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम यानी सी-यूएएस सिस्टम कहा जाता है। वर्तमान में केवल इजराइली आयरन डोम और अमेरिकी सेंचुरियन सी-रैम सिस्टम को ही इस तरह के ड्रोन हमलों को हराने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा दक्षिण कोरियाई हाइब्रिड प्रणाली और रूस की नवीनतम पीढ़ी की पैंटिर प्रणाली भी इस प्रकार के ड्रोन हमलों को बेअसर कर सकती है।
सीमा पर से आते रहे हैं ड्रोन
बीएसएफ ने पिछले एक साल के भीतर जम्मू सेक्टर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके ड्रोन घुसपैठ के कई प्रयासों को नाकाम किया है। आखिरी मामला इस साल 24 अप्रैल को दर्ज किया गया था जब पाकिस्तान से दो ड्रोन जम्मू जिले के अरनिया सेक्टर में घुसे थे और बीएसएफ ने गोलियां चलाकर मार गिराया था।
13 अगस्त 2019: अमृतसर के मुहवा गांव में एक धान के खेत में पाकिस्तानी ड्रोन दुर्घटनाग्रस्त पाया गया था।
25 सितम्बर, 2019: तरनतारन के झाबल इलाके से एक जले हुए पाकिस्तानी ड्रोन के अवशेष बरामद हुए।
01 अक्टूबर 2019: फाजिल्का सेक्टर में एक पाकिस्तानी ड्रोन भी देखा गया लेकिन घुसपैठ को नाकाम कर दिया गया।
20 जून, 2020: पुलिस ने जम्मू-कश्मीर में तीन हेक्साकॉप्टर ड्रोन बरामद किये।
09 सितम्बर, 2020: कठुआ के रसाना गांव के पास ड्रोन से गिराए गए हथियार।
19 सितम्बर, 2020: नियंत्रण रेखा के पास राजौरी जिले में ड्रोन से हथियार गिराए गए।
22 सितम्बर, 2020: एलओसी से लगभग 15 किमी. दूर अखनूर के बाहरी इलाके सोहल खड्ड में ड्रोन से गोला-बारूद गिराया गया।
24 अप्रैल, 2021: पाकिस्तान से दो ड्रोन जम्मू जिले के अरनिया सेक्टर में भारतीय क्षेत्र में घुसे, बीएसएफ के गार्डों ने गोलियां चलाकर मार गिराया।