- पीएम पर देश को भरोसा, सामने आयें और अग्निवीरों से संवाद करें
- देशभक्त कभी उपद्रव नहीं करता, देश की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाता
आंदोलन के लिए भड़का रहे : कुछ राजनीतिबाजों और आंदोलनजीवियों ने तलाश लिया है विरोध का अवसर
जब आप देश की सड़कों पर सुबह-सुबह निकलते हैं, तो कई युवा सेना की भर्ती की तैयारी के लिए उन सड़कों पर दौड़ लगाते मिल जायेंगे। पसीने से तर-बतर इन युवाओं का एक ही लक्ष्य होता है, कैसे एक दिन आर्मी की वर्दी पहन कर देश की रक्षा कर देश का मान बढ़ायें। दौड़ लगाने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन इनमें से कई युवा ऐसे भी होते हैं, जो दौड़ते-दौड़ते हार जाते हैं और उनके सपनों को पंख नहीं लग पाता। उनकी सेना में चयन होने की लालसा धरी की धरी रह जाती है। थक-हार कर उन्हें खेती-बाड़ी, छोटे-मोटे रोजगार और यहां तक कि अपना गुजारा करने के लिए 18 से 25 साल के इन युवाओं को गांव-मोहल्ले में जाकर मोबाइल का सिम कार्ड बेचने को मजबूर होना पड़ता है। मतलब इतनी मेहनत करने के बावजूद इनका भविष्य अंधकार की उस काली खाई में समा जाता है, जिससे निकल अपना भविष्य गढ़ पाना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। कई युवा डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं, तो कई युवाओं में नकारात्मकता इस कदर घर कर लेती है कि वे दिशाहीन हो जाते हैं। ऐसे युवाओं को राह दिखाने के लिए, सशक्त बनाने के लिए ही भारत सरकार ने अग्निपथ योजना को लांच किया है। साढ़े 17 साल की उम्र से लेकर 23 साल तक के युवा इस अग्निपथ स्कीम के जरिये सेना में शामिल हो अपने करियर को उड़ान दे पायेंगे। हालांकि देश के कुछ राज्यों में इस अग्निपथ योजना का बड़े पैमाने पर विरोध भी शुरू हो गया है। विरोध के क्रम में कुछ राज्यों के युवा हिंसक आंदोलन कर रहे हैं। ट्रेनों में आग तक लगायी जा रही है। दो लोगों की मौत की भी सूचना है। जाहिर है, देश के कुछ राजनीतिक दल इन युवाओं को अब हवा भी दे रहे हैं और उन्हें आंदोलन के लिए भड़का रहे हैं। यह चिंतनीय है। इसमें कोई दो राय नहीं कि अग्निपथ योजना हर दृष्टि से लाभकारी है, दसवीं, बारहवीं पास के छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदान करती है, लेकिन यह योजना अब राजनीति की बलि चढ़ती दिख रही है, तो इसके पीछे यही कारण समझ में आता है कि इस योजना को लागू करने के पहले युवाओं से संवाद स्थापित नहीं किया गया। योजना के बारे में बताया नहीं गया, जिससे राजनीतिबाजों और आंदोलनजीवियों को अपनी राजनीति चमकाने का मौका मिल गया। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी योजना के बारे में प्रचार करने का सबसे बड़ा अस्त्र संवाद ही होता है। इतनी अच्छी योजना का विरोध अगर हो रहा है, तो जाहिर है कि युवाओं तक इसका सकारात्मक पक्ष नहीं गया है। हमें लगता है कि देश के प्रधानमंत्री को युवाओं के सामने आना चाहिए और इस योजना के बारे में उन्हें बताना चाहिए। यह योजना सचमुच में क्रांतिकारी कदम है। जाहिर है, युवा अगर एक बार समझ जायेंगे, तो हमारे देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। युवाओं को यह बताने की जरूरत है कि यह योजना क्यों। जिस प्रकार से विश्व में अशांति और युद्ध का माहौल बन रहा है, उसके मद्देनजर भी आज देश को सैन्य शक्ति बढ़ाने की जरूरत है। दशकों से भारत की यह जरूरत भी रही है कि यहां हर घर में एक सैनिक तैयार हो, जो जरूरत पड़ने पर अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हर पल तैयार रहे। आज वह समय आ गया है, जब युवाओं को देश की सेना में शामिल कराया जाये। देश के युवाओं को अनुशासित, निडर, स्किल्ड और आत्मनिर्भर बनाया जाये। उन्हें बेरोजगारी की खाई में फंसने से बचाया जाये। उन्हें नकारात्मक गतिविधियों और देश विरोधी शक्तियों के चंगुल में फंसने से भी बचाया जाये। आज विरोध के नाम पर हिंसक आंदोलन कर रहे इन युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि देश की सेना के कुछ नियम होते हैं, जरूरतें होती हैं, योजना होती है। सेना में भर्ती होना सिर्फ रोजगार का माध्यम नहीं है। ये देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला होता है। आज देश को युवा सेना की जरूरत है। भारत के सामने अभी कई प्रकार की चुनौतियां हैं। दुश्मन देश भारत की विकास यात्रा को प्रभावित करने के लिए नये-नये षडयंत्र रच रहे हैं। इन्हीं षडयंत्रों को ध्वस्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अग्निपथ योजना को लांच किया है। क्या है अग्निपथ योजना, कैसे होंगे देश के युवा इससे लाभान्वित और क्यों है देश को इसकी जरूरत, बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह।
एक वक्त था, जब भारत सोने की चिड़िया कहलाता था। उसके बाद धीरे-धीरे उसके पथ में कई प्रकार की चुनौतियों ने जन्म लिया। कभी भारत को इस्लामिक आक्रांताओं का सामना करना पड़ा, तो कभी अंग्रेजी ताकतों का। इन सभी ने भारत को इतना लूटा और शोषण किया कि सोने की चिड़िया कहलाने वाले इस देश में कई तरह की समस्याओं ने जन्म लिया। समस्या इतनी विकराल हो गयी कि यहां लोग आपस में ही लड़ने लगे। देश का विभाजन तक हो गया। भारत की राह कभी आसान नहीं रही। उसे हमेशा अग्निपथ पर ही चलना पड़ा। लेकिन आज देश बदल रहा है। आज देश फिर से अपनी खोयी प्रतिष्ठा को वापस हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आज भारत की पहचान विश्व पटल पर मजबूत और विकासशील देश के रूप में हो रही है। आज का भारत नया भारत है। आज का भारत पलटवार भी करता है। दुश्मन देश के घर में घुस कर उसे जवाब भी देता है। आज भारत की सेना का मनोबल भी काफी हाई है। आज भारतीय सेना आधुनिक अस्त्र-शस्त्र से सुशोभित है। लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि जब भी कोई बड़ा बदलाव होता है, परिवर्तन होता है, उसके साथ-साथ नयी-नयी चुनौतियों का भी जन्म होता है। उदहारण के तौर पर, जब देश कोरोना से लड़ रहा था, तब किसी ने ये उम्मीद नहीं की थी कि भारत कोरोना से लड़ने के लिए अपने सुरक्षा कवच का निर्माण खुद कर लेगा। यानी भारत खुद ही कोरोना के टीके का निर्माण कर लेगा। ये बड़ा बदलाव था, लेकिन यहां भी चुनौतियों ने पीछा नहीं छोड़ा। लोग पहले तो इस टीके से डर रहे थे। कई प्रकार की अफवाहें भी फैलायी गयीं, लेकिन अंत में क्या हुआ। अंत में लोगों ने भरोसा किया कि भारत अब उस लायक है, जो महामारी की सफल वैक्सीन का निर्माण भी कर सकता है। आज भारत के लगभग सभी लोगों ने इस सुरक्षा कवच को अपना कर अपनी जिंदगी को बचाया है। लेकिन देश के सामने एक बड़ी चुनौती भी है। यह चुनौती दुश्मन देश पेश कर रहे हैं। और इन चुनौतियों से निबटने का एक मात्र हथियार है सैन्य शक्ति का मजबूत होना। इसी को ध्यान में रख कर अब युवा सैन्य शक्ति की जरूरत महसूस हो रही है। इसीलिए मोदी सरकार ने अग्निपथ के रूप में एक बड़ा कदम उठाया है। इस योजना का उद्देश्य नौकरी, रोजगार के साथ-साथ दुश्मन देश को यह मैसेज भी देना है कि अब भारत में घर-घर में सेना है। जिस प्रकार से विश्व में अशांति का एक वातावरण बन रहा है, वैसे में भारत की तेजी से बढ़ती विकास यात्रा दुश्मन देशों को पच नहीं रही है। वे लगातार प्रयासरत हैं कि कैसे भारत में अशांति का माहौल बनाया जाये। कैसे भारत की विकास यात्रा पर ब्रेक लगाया जाये। इसके लिए देश विरोधी ताकतें किसी भी सही नीति का भ्रामक प्रचार कर यहां के युवाओं और लोगों को बरगलाने में जुट जाती हैं। दुश्मन देशों को मुहतोड़ जवाब देने के लिए भारत को अपनी सैन्य शक्ति में एक बड़े बदलाव की जरूरत थी, जिसे दुनिया के कई सुपर पावर देश अपना चुके हैं। कड़ी चुनौतियों से पार पाने के लिए ही भारतीय सेना की बहाली प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हुआ है। जाहिर है, हर बदलाव नयी चुनौतियां लेकर आता है। इसमें भी यही हो रहा है। लेकिन सोचने की जरूरत है कि एक सिस्टम, जो अंग्रेजों के जमाने में बना, उसे अब समय की मांग के अनुरूप बदलने की जरूरत है। अब समय आ गया है कि भारत के घर-घर में अग्निवीर का जन्म हो। उसे इतना लायक बनाया जायेगा कि वह अग्निपथ पर सवार भारत को अपनी ऊर्जा से गौरवान्वित करेगा। इसीलिए भारत सरकार ने देश के युवाओं को फौलादी बनाने के लिए, आत्मनिर्भर बनाने के लिए, अनुशासित बनाने के लिए, माता-पिता का मजबूत सहारा बनाने के लिए और दुश्मन देशों के नकारात्मक अरमानों को चकनाचूर करने के लिए अग्निपथ स्कीम को लांच किया है। इस अग्निपथ की अग्नि में लाखों अग्निवीर तैयार होंगे, जो देश की विकास यात्रा में सफलताओं के पंख जड़ेंगे। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अग्निपथ योजना को युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर बताया है। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं को सेना में भर्ती होने और देश की सेवा करने का मौका मिलेगा। इस योजना से देश की सुरक्षा मजबूत होगी। इससे देश में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए सभी भारतवासी यह महसूस कर रहे हैं कि अपना देश मजबूत हो। जाहिर है, देश तभी मजबूत होगा, जब उसकी सेना मजबूत बनेगी। सेना की मजबूती के लिए युवा सैन्य का होना जरूरी है। उनके पास आधुनिक उपकरण भी होने चाहिए। सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए वर्ष 2020-21 में भारत का रक्षा बजट 4.85 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें से 54 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ सैलरी और पेंशन पर खर्च हो रहा था। सरकार चाह कर भी सेना के आधुनिकीकरण पर ज्यादा जोर नहीं दे पाती। इसलिए सेना के आधुनिकीकरण को ध्यान में रखकर ही यह योजना बनायी गयी है।
क्या है अग्निपथ योजना
भारत सरकार ने सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना लांच की है। इसमें चार साल के लिए सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती होगी, जिन्हें अग्निवीर कहा जायेगा। इस साल करीब 46 हजार युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल करने की योजना है। अग्निवीरों की उम्र साढ़े 17 से 23 वर्ष के बीच होगी। इस योजना के मुताबिक सैनिकों को छह महीने की मिलिट्री ट्रेनिंग दी जायेगी। पहले साल 30 हजार प्रति माह की सैलेरी मिलेगी। दूसरे साल 33 हजार, तीसरे साल साढ़े 36 हजार और चौथे साल 40 हजार सैलेरी मिलेगी। साथ में नियमानुसार राशन, वर्दी और यात्रा भत्ता दिया जायेगा। योजना के मुताबिक भर्ती हुए 25 फीसदी युवाओं को सेना में स्थायी काडर के रूप में शामिल किया जायेगा। बाकी 75 फीसदी को नौकरी छोड़नी पड़ेगी।
अग्निपथ को राजनीति का अखाड़ा न बनायें
अग्निपथ स्कीम, देश के युवाओं के लिए एक अवसर है, लेकिन देश के कुछ युवा इसे पूरी तरह समझ नहीं पाये हैं। यही कारण है कि कई राज्यों में अग्निपथ को विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। युवा कहीं ट्रेन जला रहे हैं, कहीं रोड जाम कर रहे हैं, या अन्य सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसका कारण, कहीं न कहीं युवाओं के बीच फैलाया गया भ्रामक प्रचार भी है।
देश के राजनीतिबाज या आंदोलनजीवी इसे हवा दे रहे हैं। दो साल कोरोना के कारण सेना में भर्ती न निकलना भी इसका एक प्रमुख कारण हो सकता है। सेना में स्थायी नौकरी का न होना, रिटायरमेंट के बाद पेंशन न मिलना, कई युवा जिन्होंने अपना फिजिकल और मेडिकल टेस्ट क्लीयर कर लिया है और अब अग्निपथ स्कीम लांच होने के बाद मतभेद से उनमें असंतोष पनप रहा है, ये भी एक प्रमुख कारण है। इसके लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार इन युवाओं के लिए एक वृहद संवाद स्थापित करे और हर एक युवा को यह बताया जाये कि देश के प्रति उसका क्या कर्तव्य है और यह योजना क्यों लायी गयी है। यह योजना दरअसल युवाओं को दक्ष, कारगर और फौलादी बनाने के लिए लांच की गयी है। चार साल के बाद युवाओं को दूसरे क्षेत्रों में भरपूर अवसर मिलेगा। जो रोजगार करना चाहेंगे, उन्हें पूंजी मिल जायेगी, उन्हें दूसरे के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा। बेरोजगार और बेकार बैठने से अच्छा है, अग्निपथ पर चलना।