आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े आचार संहिता उल्लंघन मामले में रांची सिविल कोर्ट में सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अदालत में 205 की पिटीशन दाखिल कर पेशी से छूट दिये जाने की गुहार लगायी थी। जिसपर कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने सीएम के आवेदन को दरकिनार करते हुए इन्हें अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होने की छूट नहीं दी है। अब आचार संहिता मामले में सीएम को 14 जुलाई को कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा।

लोकसभा चुनाव 2019 का है मामला
बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में मतदान के दिन छह मई 2019 को बूथ नंबर 388 (संत फ्रांसिस स्कूल, हरमू) में हेमंत सोरेन अपनी पत्नी के साथ मतदान करने गये थे। हेमंत सोरेन अपने गले में पार्टी का कपड़ा लटकाए हुए मतदान स्थल पर पहुंचे थे। इस मामले में कार्यपालक दंडाधिकारी राकेश रंजन उरांव ने अरगोड़ा थाना में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा (कांड संख्या 149/2019) के तहत नामजद प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। इसी मामले में 14 जुलाई को सीएम की रांची सिविल कोर्ट में पेशी होनी है।

खनन लीज केस में मुख्यमंत्री के वकील ने फिर मांगा वक्त, निर्वाचन आयोग ने जतायी नाराजगी
रांची। पत्थर खनन लीज मामले में भारत निर्वाचन आयोग में सुनवाई हुई। भाजपा के लिए वरीय अधिवक्ता मनिंदर सिंह और सिद्धार्थ दवे ने आयोग के समक्ष पक्ष रखा। वहीं वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और एम दत्ता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से कमीशन के समक्ष पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान सीएम के अधिवक्ता ने एक बार फिर सुनवाई के लिए समय देने का आग्रह किया, जिस पर कमीशन ने नाराजगी जाहिर की। इसके बाद आयोग में मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई का समय दिया है। यहां बता दें कि इस मामले की शिकायत झारखंड के बीजेपी नेताओं ने चुनाव आयोग से की थी, जिसके बाद चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नोटिस का जवाब देने को कहा था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पूर्व में नोटिस का जवाब दे चुके हैं। झारखंड प्रदेश भाजपा की तरफ से लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9ए के तहत मुख्यमंत्री को विधायकी से अयोग्य ठहराने के लिए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया था। वहीं विधायक बसंत सोरेन पर लगे आरोपों की सुनवाई 15 जुलाई को निर्वाचन आयोग करेगा।

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