रांची (आजाद सिपाही)। रांची में 10 जून को जुमे की नमाज के बाद मेन रोड में हिंसा भड़की थी। इसमें दो लोगों की मौत हो गयी थी और पुलिस समेत कई लोग घायल हो गये थे। इस मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से आरोप लगाया जा रहा था कि मेन रोड स्थित संकट मोचन मंदिर से पहले गोली चलायी गयी थी। उसके बाद प्रदर्शन कर रहे मुस्लिम पक्ष के लोगों ने पत्थरबाजी की। मुस्लिम पक्ष की ओर से यह भी आरोप लगाया गया था कि हिंदू संगठन से जुड़े भैरव सिंह ने उक्त मंदिर से फायरिंग की थी। इन आरोपों के मद्देनजर रांची पुलिस ने डीएसपी अंकिता के नेतृत्व में जांच करायी। जांच रिपोर्ट आ गयी है। इसमें मुस्लिम पक्ष का यह आरोप झूठा साबित हुआ है कि पहले मेन रोड के संकट मोचन मंदिर से गोली चलायी गयी थी और गोली भैरव सिंह ने चलायी थी। पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है कि घटना के समय संकट मोचन मंदिर की छत पर सिर्फ एक लड़का था, जो मोबाइल से घटना की फोटो ले रहा था। बीच-बीच में फोटो लेने पर उसके कैमरे का फ्लैश चमक रहा था। जांच में पाया गया कि घटना के वक्त मेन रोड में भैरव सिंह मौजूद नहीं थे। 10 जून की घटना में भैरव सिंह की कोई संलिप्तता नहीं है। मामले की जांच के दौरान पुलिस की टीम ने भैरव सिंह के घर से लेकर संकट मोचन मंदिर तक सारी सीसीटीवी फुटेज, भैरव सिंह के मोबाइल का सीडीआर और लोकेशन, सभी की जांच की।

इसमें कहीं से भी कोई ऐसा सबूत नहीं मिला, जिसमें भैरव सिंह मेन रोड में हो। घटना के वक्त भैरव सिंह परिवार के साथ अपने घर में थे। वह बाहर नहीं निकले। वहीं मंदिर से गोली चलने की बात भी झूठी निकली। काफी गहनता से की गयी छानबीन में पुलिस को कोई ऐसा सबूत नहीं मिला। वहीं एक सोशल मीडिया में वायरल वीडियो की भी जांच की गयी, जो मंदिर से फोटो लेने के वक्त मोबाइल का फ़्लैश लाइट जल रहा था। इसके बाद कुछ लोगों ने सोशल मीडिया में गोली चलने की अफवाह उड़ा दी थी। बता दें कि 10 जून को प्रदर्शनकारियों ने भैरव सिंह के घर को घेर लिया था। बाहर से घर पर पत्थरबाजी की गयी थी। बाहर से तोड़फोड़ भी की गयी थी। काफी संख्या में वहां मुसलमान एकत्र हो गये थे और भैरव सिंह के परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे थे। उन लोगों ने घर का गेट भी तोड़ने की कोशिश की। इसकी शिकायत भैरव सिंह ने डीजीपी से लेकर तमाम वरीय पुलिस अधिकारियों से की थी।

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