रांची। प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने रांची में सेना जमीन घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रांची के पूर्व उपायुक्त निलंबित आइएएस छवि रंजन समेत 10 आरोपियों के खिलाफ सोमवार को चार्जशीट दाखिल कर दी। आरोपियों पर सेना के कब्जे वाली 4.55 एकड़ भूमि के मूल दस्तावेज में छेड़छाड़ कर फर्जी दस्तावेज के आधार पर जमाबंदी कराने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा इडी ने सेना के कब्जे वाली जमीन और बजरा मौजा की जमीन से संबंधित 74.39 करोड़ की संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है।

इन 10 आरोपियों पर चार्जशीट
इडी ने भूमि घोटाला में अब तक 10 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें निलंबित आइएएस छवि रंजन के अलावा कोलकाता के कारोबारी अमित अग्रवाल, जगतबंधु टी इस्टेट के मालिक दिलीप घोष, बड़गाईं सीआइ भानु प्रताप प्रसाद, जमीन दलाल प्रदीप बागची, रिम्स का निलंबित कर्मी अफसर अली, इम्तियाज खान, फैयाज खान, तलहा खान और मोहम्मद सद्दाम शामिल हैं।

13 अप्रैल को छापामारी, 7 मई को छवि की गिरफ्तारी
गौरतलब है कि इडी ने 13 अप्रैल को छवि रंजन सहित 18 लोगों के 22 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके बाद 14 अप्रैल को फर्जी रैयत प्रदीप बागची, बड़गाईं अंचल के राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था। रांची के पूर्व उपायुक्त छवि रंजन से दो बार पूछताछ हुइ थी। उनके जवाब से संतुष्ट नहीं होने के बाद इडी ने 7 मई को छवि रंजन को गिरफ्तार कर लिया था।

आयुक्त की जांच में हुआ था सबसे पहले खुलासा
सेना के कब्जे वाली 4.55 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री मामले में फर्जीवाड़ा का खुलासा सबसे पहले आयुक्त नितिन कुलकर्णी की जांच रिपोर्ट में हुआ था। उक्त रिपोर्ट में यह बात सामने आयी थी कि प्रदीप बागची नामक व्यक्ति ने फर्जी रैयत बन कर जगतबंधु टी इस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दिलीप कुमार घोष को जमीन बेची। जमीन की खरीद-बिक्री के लिए रजिस्ट्री में प्रदीप बागची ने जिन होल्डिंग नंबर से संबंधित दो अलग-अलग कागजातों को लगाया था, वे जांच में फर्जी मिले थे।

इडी ने 41 सर्च और पांच सर्वे किये
इडी ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने के बाद कहा है कि सेना के कब्जे वाली जमीन के फर्जीवाड़ा मामले में 41 सर्च और पांच सर्वे किये गये। इसमें बरियातू स्थित 4.55 एकड़ जमीन और बजरा में 7.16 एकड़ जमीन भू-राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से भू-माफियाओं के नाम फर्जी तरीके से म्यूटेशन करने के सबूत मिले। इडी ने मनी लांड्रिंग के तहत जांच शुरू की थी, जिसमें भू-माफिया का रैकेट सामने आया, जिनका कोलकाता से तार जुड़ने के सबूत मिले। छापेमारी में भू-राजस्व विभाग की जाली मुहर, भूमि के जाली दस्तावेज, रुपयों के लेन-देन समेत कई साक्ष्य मिले। इडी ने बताया कि इन दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी करायी गयी, जिसमें जालसाजी सामने आयी। इडी ने कहा है कि सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। जांच अभी जारी है।

इडी ने अस्थायी रूप से 74 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की
रांची। इडी ने सोमवार को सेना के कब्जे वाली बरियातू स्थित जमीन और हेहल अंचल के बजरा मौजा की जमीन को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। सेना के कब्जे वाली 4.55 एकड़ और हेहल अंचल के बजरा मौजा की 7.16 एकड़ जमीन को अटैच किया गया है। इस जमीन की कीमत 74.39 करोड़ रुपये आंकी गयी है। इडी ने कहा है कि इन दोनों भूखंडों को भू-राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से भू-माफियाओं के नाम फर्जी तरीके से म्यूटेशन किया गया है।

अमित और दिलीप की रिमांड खत्म, गये जेल
रांची। सेना जमीन घोटाला मामले में गिरफ्तार कारोबारी अमित अग्रवाल और जगतबंधु टी इस्टेट के मालिक दिलीप घोष को सोमवार को जेल भेज दिया गया। इडी ने उन्हें तीन दिन की रिमांड पर लिया था। सोमवार को दोनों की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद इडी ने स्पेशल कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया। गौरतलब है कि सेना जमीन घोटाला में सात जून को दोनों को इडी ने गिरफ्तार किया था। इनसे पूछताछ के लिए कोर्ट ने इडी को तीन दिन की मंजूरी दी थी। सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं, जिन पर इडी आगे बढ़ेगी।

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