बेगूसराय। राष्ट्रीय फलक पर स्थापित नाट्य संस्था द फैक्ट आर्ट एंड कल्चरल सोसाइटी द्वारा बीते रात हिंदी साहित्य के महान विभूति भारतेन्दु हरिश्चंद्र की कालजयी नाट्य रचना ”सत्य हरिश्चंद्र” की शानदार प्रस्तुति फैक्ट स्पेस बेगूसराय में किया गया। सत्य हरिश्चंद्र को प्रायोजित किया गया था संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा।

प्रवीण कुमार गुंजन के निर्देशन में मंचित नाटक के दोनों शो में अभिनेताओं ने दिखा दिया कि ”चंद्र टरे सूरज टरे, टरे जगत व्यवहार, पै दृढ़व्रत हरिश्चंद्र के, टरे न सत्य विचार…” सत्य की चर्चा जब भी होगी महाराजा हरिश्चंद्र का नाम जरूर लिया जाएगा। सपने में भी वचन देकर उसका उन्होंने निर्वहन किया। सत्य की रक्षा के लिए उन्होंने हर तरह की परेशानियों को झेला।

भारतेन्दु हरिश्चंद्र द्वारा 1875 में लिखित नाटक सत्य हरिश्चंद्र का नौटंकी शैली में मंचन हर किसी केे मन को छू गया। नाटक की शुरुआत इक्ष्वांकु वंश के प्रतापी महाराज राजा हरिश्चंद्र द्वारा यज्ञ से होती है। यज्ञ के प्रभाव से देवताओं का सिंहासन हिलने लगता है और उन्हें भय हो जाता है। देवता विश्वामित्र को राजा हरिश्चंद्र की परीक्षा लेने के लिए भेजते हैं।

वह सपने में राजा हरिश्चंद्र से उनका धन-वैभव और राज्य दान में मांग लेते हैं। सपने में दिए गए वचन को निभाते हुए राजा हरिश्चंद्र पत्नी तारामति और पुत्र रोहिताश्व के साथ काशी आते हैं। धन कमाने के लिए वह स्वयं को डोमराजा को बेच देते हैं। एक रात उनकी पत्नी उनके पुत्र की मृत देह लेकर पहुंचती है और वह उससे भी कर की मांग करते हैं।

पिता, पत्नी और पुत्र के बीच स्नान घाट में उत्पन्न यह दृश्य देखकर देवता भी विस्मित रह जाते हैं। जैसे ही वह अपने पुत्र से कर रूपी कफन लेने लगते हैं, देवलोक से पुष्प वर्षा होने लगती है। इसके साथ ही सभी देव राजा हरिश्चंद्र को आशीर्वाद देकर सारा वैभव लौटा देते हैं।

पूरी टीम की मेहनत नाटक के दौरान देखने को मिली, अभिनेता कलाकारों में गजब की ऊर्जा और आपसी तालमेल था। सत्य हरिश्चंद्र की भूमिका में सौरभ शर्मा, सेव्या आइशा सिंह यादव, विश्वामित्र दिव्यांशु गुप्ता ने अपने अभिनय के प्रवाह से दर्शकों को काफी प्रवाहित किया।

वैभव कुमार, प्रिया कुमारी, मो. रहमान, दीपक कुमार, विकास कुमार पांडेय, रुद्र सेहरा एवं राहुल शर्मा का भी अभिनय शानदार था। सत्य हरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्व की भूमिका में छोटी सी बच्ची स्माइली सिंह ने दर्शकों को काफी भावुक कर दिया। चिंटू कुमार का प्रकाश परिकल्पना दृश्य के अनुकूल था। साउंड मो. रहमान, संगीत दीपक कुमार, अमरेश कुमार एवं चंदन वत्स का था। सत्य हरिश्चंद्र का बेहतरीन कॉस्ट्यूम डिजाइन सहायक निर्देशक खुशबू कुमारी ने किया।

नाटक की परिकल्पना और निर्देशन प्रवीण कुमार गुंजन का था जो काफी समकालीन व्याख्या के साथ एक अदभुत अनुभूति कराती है। मंचन के पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन शिक्षाविद प्रो. अशोक कुमार सिंह अमर, राजकिशोर सिंह, वरिष्ट रंगकर्मी अनिल पतंग, फैक्ट के अध्यक्ष विश्वरंजन कुमार सिंह राजू, समाजसेविका सविता सुल्तानिया एवं फिल्म अभिनेता अमिया कश्यप ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन कुमार अभिजीत मुन्ना ने किया।

Share.

Comments are closed.

Exit mobile version