नयी दिल्ली। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने यूजीसी-नेट परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की है। प्रथम दृष्टया गड़बड़ी के संकेत मिलने के बाद परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया है। सरकार के मुताबिक परीक्षा में गड़बड़ी के मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी जा रही है। मेडिकल इंट्रेंस परीक्षा (नीट) रिजल्ट का विवाद अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है कि शिक्षा मंत्रालय ने यूजीसी-नेट परीक्षा को भी रद्द करने का एलान किया है। शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूजीसी-नेट परीक्षा नये सिरे से आयोजित की जायेगी। जिसके लिए जानकारी अलग से साझा की जाएगी।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक एनटीए ने यूजीसी-नेट परीक्षा 18 जून, 2024 को देश के भिन्न शहरों में दो चरणों में ओएमआर (पेन और पेपर) मोड में आयोजित की थी। 19 जून यानी यूजीसी को परीक्षा के लिए गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई से कुछ इनपुट मिले। इन जानकारियों से प्रथम दृष्टया संकेत मिला कि परीक्षा की सत्यनिष्ठा से समझौता किया गया होगा।
कंट्रोवर्सी की वजह से घिरी है एनटीए
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए पहले से ही नीट यूजी 2024 विवाद को लेकर आरोपों से घिरी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को दो हफ्तों का नोटिस भी जारी किया है। इसकी अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
20 हजार स्टूडेंट्स ने एग्जाम में गड़बड़ी को लेकर दायर की याचिका
देशभर में नीट यूजी 2024 को लेकर अलग-अलग राज्यों में लगभग 20 हजार स्टूडेंट्स ने याचिकाएं दायर की थीं, जिसमें परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत की गयी है। ग्रेस मार्क्स के खिलाफ दायर की गयी याचिका में कहा गया कि एनटीए ने अब तक ये नहीं बताया कि उन्होंने स्टूडेंट्स को ग्रेस मार्क्स देने के लिए क्या तरीका अपनाया। वहीं, एग्जाम के पहले एनटीए की तरफ से जारी इन्फॉर्मेशन बुलेटिन में भी ग्रेस मार्क्स देने के प्रावधान का जिक्र नहीं था। ऐसे में कुछ कैंडिडेट्स को ग्रेस मार्क्स देना सही नहीं है।

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