रांची। मुक्ति संस्था ने रविवार को जुमार नदी तट पर 31 लावारिस शवों का सामूहिक रूप से अंतिम संस्कार किया। संस्था के सदस्यों ने दाह संस्कार से पूर्व मृत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इसके बाद सभी शवों को मुखाग्नि दी गयी। नौ सालों से लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर रही संस्था कई दिनों से इन शवों के दाह संस्कार की तैयारी कर रही थी। रिम्स में कानूनी औपचारिकता पूरी करने के बाद मोर्चरी में पड़े सभी शवों को ट्रैक्टर से जुमार नदी तट पर लाया गया। इनमें से कई शव गल गये थे। इसलिए उन शवों को प्लास्टिक में सील कर दिया गया था। इसके बाद जुमार नदी के तट पर एक साथ 31 चिता सजा कर विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। संस्था ने अब तक 1754 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया है। पुलिस ने इन 31 लवारिस शवों की पहचान के लिए काफी प्रयास किया। कई बार विज्ञापन भी निकाले, लेकिन इन शवों की पहचान नहीं हो सकी। परिजनों की कोई खोज-खबर नहीं आने के बाद लंबे समय से रिम्स में रखे गये इन शवों को सामूहिक दाह संस्कार के लिए संस्था को सौंप दिया गया।
संस्था के अध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने सभी शवों को मुखाग्नि दी। अंतिम अरदास परमजीत सिंह टिंकू ने किया। इस मौके पर संस्था के रवि अग्रवाल, रतन अग्रवाल, आशीष भाटिया, आरके गांधी, हरीश नागपाल, सौरभ बथवाल, संदीप पपनेजा, कमल चौधरी, आदित्य राजगढ़िया, राजा गोयनका, नीरज खेतान, केसी चौधरी, गौरी शंकर शर्मा, सीताराम कौशिक, पंकज मिढ़ा, राहुल जयसवाल, राहुल चौधरी, सुनील अग्रवाल, अरुण कुटरियार, संजय कुमार अग्रवाल, गौरव केडिया समेत अन्य मौजूद थे।
लावारिसों का वारिस है मुक्ति संस्था, रिम्स में पड़े 31 शवों का किया दाह संस्कार
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