भारतीय सेना की अनूठी पहल, 393 सफल ऑपरेशन से सैकड़ों लोगों की लौटी रोशनी
रांची। भारतीय सेना द्वारा आयोजित चार दिवसीय मेगा नेत्र चिकित्सा शिविर ‘दृष्टि 2026’ का गुरुवार को नामकुम सैन्य अस्पताल में सफलतापूर्वक समापन हो गया। पूर्वी कमान के तत्वावधान में ब्रह्मास्त्र कोर की ओर से आयोजित इस विशेष चिकित्सा अभियान ने हजारों लोगों के जीवन में नई उम्मीद और रोशनी का संचार किया। 16 जून से 19 जून 2026 तक चले इस शिविर में नई दिल्ली स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञों और चिकित्सा दलों ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं।

चार दिनों तक चले इस मेगा हेल्थ कैंप में लगभग 2500 लोगों को अत्याधुनिक नेत्र चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिला। लाभार्थियों में पूर्व सैनिक, वीर नारियां, सैन्य परिवारों के सदस्य और रांची समेत आसपास के जनजातीय क्षेत्रों के नागरिक शामिल रहे। शिविर के दौरान मरीजों की व्यापक नेत्र जांच, उन्नत डायग्नोस्टिक परीक्षण, विशेषज्ञ परामर्श और दृष्टि सुधार संबंधी उपचार किए गए।

इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि 393 सफल नेत्र शल्यक्रियाएं रहीं। इन ऑपरेशनों के माध्यम से कई लोगों को फिर से स्पष्ट दृष्टि प्राप्त करने का अवसर मिला। चिकित्सा विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक और उच्च स्तरीय उपचार सुविधाओं का उपयोग कर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं।

शिविर का समापन समारोह नामकुम स्थित त्रिनेत्र ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनके साथ ब्रह्मास्त्र कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल यश अहलावत सहित सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत एक विशेष डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन से हुई, जिसमें शिविर की पूरी कार्यप्रणाली, मरीजों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया और चिकित्सा सेवाओं को प्रदर्शित किया गया। इसके बाद आयोजित सम्मान समारोह में रक्षा राज्य मंत्री ने ‘टीम दृष्टि’ के डॉक्टरों, चिकित्सा कर्मियों और चयनित लाभार्थियों को सम्मानित किया।

अपने संबोधन में संजय सेठ ने भारतीय सेना की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि सेना केवल देश की सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कल्याण और जनसेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि ‘दृष्टि 2026’ जैसे अभियान समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

भारतीय सेना की यह पहल एक बार फिर ‘सेवा परमो धर्मः’ की भावना को साकार करती है और यह संदेश देती है कि सेना देशवासियों के स्वास्थ्य, विश्वास और बेहतर भविष्य के लिए भी समान रूप से समर्पित है।

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