लातेहार: मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड नामधारी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि आदिवासी नेताओं ने आदिवासी का हितैषी बनकर न सिर्फ उनका वोट बटोरा, बल्कि उनकी संपत्ति भी लूट ली। सोमवार को लातेहार में भाजपा एसटी मोरचा के प्रमंडलीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता को गुमराह करनेवाले ऐसे नेताओं को करारा तमाचा मारना है। विकास विरोधी शक्तियों को झारखंड से उखाड़ फेंकना है। उन्होंने कहा कि आदिवासी सरना समाज की भावना है कि झारखंड में धर्मांतरण रूके। इसे लेकर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। कोशिश है कि विधानसभा में धर्मांतरण निषेध बिल लाकर झारखंड में धर्मांतरण को रोका जाये।
आदिवासी संस्कृति को बचाने के लिए उठाये ठोस कदम : सीएम ने कहा कि सरकार की नीति और नीयत साफ है। सरकार जनजाति समाज के उत्थान के लिए कार्य कर रही है। झारखंड का विकास तभी संभव है, जब आदिवासियों का सर्वांगीण विकास होगा। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की पहचान उनकी संस्कृति है, इसलिए सरकार ने आदिवासी संस्कृति और उनके धार्मिक स्थलों (सरना, मसना और जाहेरस्थान) को बचाने के लिए बजट में अलग से प्रावधान किया है। गरीबों की सरकारी सहायता में रोड़ा बनने वाले उपायुक्तों पर होगी कड़ी कार्रवाई : सीएम ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता गरीबी को समाप्त करना है।
गरीबों को मिलने वाली सरकारी सहायता में बाधक बनने वाले उपायुक्तों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही राज्य से गरीबी को समाप्त कर सकती है। इसलिए सभी लोग बेटा और बेटी में फर्क किये बिना अपने बच्चों को शिक्षा जरूर दें। आनेवाले समय में सरकार जनजातीय समाज को अन्य विकसित समाज के बराबर लाकर खड़ा करेगी। जनजातीय सम्मेलन में मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रामकुमार पाहन, विधायक गंगोत्री कुजूर, विमला प्रधान, हरेकृष्ण सिंह, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष समीर उरांव, मोर्चा के उपाध्यक्ष अशोक बड़ाइक, सुनील फकीरा कच्छप, बिंदेश्वर उरांव, अवधेश सिंह चेरो, रामजीत सिंह, मोहन सिंह, आशेष बारला और अनिता कुमारी समेत कई कार्यकर्ता और जनजाति समाज के लोग मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार कभी भी गरीबों की जमीन छीनना नहीं चाहती है, बल्कि उनको उनका हक दिलाने के लिए नियम बनाये गये हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष गलत प्रचार कर सीधे-साधे आदिवासियों को गुमराह कर रहा है, लेकिन सरकार कभी विपक्षी पार्टियों की मंशा पूरा नहीं होने देगी। सीएम ने कहा कि सरकार द्वारा विकास योजनाओं में ग्रामीणों से ली जाने वाली जमीन के मुआवजा का भुगतान प्रशासन 90 दिनों के अंदर करे। इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी।