रांची। डीजीपी डीके पांडेय ने कहा कि सभी जिले के एसपी संगठित अपराध पर लगाम लगायें। वाहन चोरी और लूट की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस रणनीति बनायें। अपराधियों की धर-पकड़ करें। डीजीपी ने अपने मातहतों को ये स्पष्ट निर्देश दिया कि क्राइम पर कंट्रोल हर हाल में हो जाये। इससे पहले पिछले पांच महीने के अपराध, विधि-व्यवस्था और नक्सली समस्या की समीक्षा की गयी। दो दिनों तक चली समीक्षा बैठक में अपराध के आंकड़ों को लेकर डीजीपी ने पुलिस कप्तानों पर नाराजगी भी जतायी।
साइबर क्राइम और पड़ोसी राज्यों से फर्जी कॉल बढ़े : पिछले वर्ष की तुलना में इस साल के पहले पांच माह में संज्ञेय अपराध में 2323 मामले की बढ़ोत्तरी हुई है, लूट के 36, वाहन चोरी के 321 मामले ज्यादा हुए हैं। कोयला चोरी और रंगदारी समेत तमाम अपराधों पर डीजीपी ने जिलों के एसपी को तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है।
समीक्षा बैठक में साइबर क्राइम के मामलों में कमी की बात सामने आयी, लेकिन चौंकाने वाले तथ्य यह सामने आया कि पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती जिलों से फर्जी कॉल आने की संख्या बढ़ गयी है। डीजीपी ने पुलिस पदाधिकारियों को हिदायत दी कि बिहार और पश्चिम बंगाल की पुलिस के साथ संपर्क कर यह देखें कि कहीं इसमें झारखंड के साइबर अपराधियों की संलिप्तता तो नहीं।
मॉब लिचिंग के मामलों को गंभीरता से लें : डीजीपी ने मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के आधार पर अगले एक-दो दिन में दिशा-निर्देश जारी करने की बात कही। साथ ही जिलों के एसपी, डीआइजी और आइजी को निर्देश दिया कि लिंचिंग की घटनाएं किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जायेगी। ऐसे मामलों में गंभीरता दिखाने का निर्देश दिया।
पिछले साल की तुलना में बढ़े अपराध, कंट्रोल करें: डीजीपी
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