वर्तमान सरकार में औसतन प्रतिवर्ष 1052 किमी नयी सड़क बनी
द इंस्टीट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स और पथ निर्माण विभाग के कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री
रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि क्वालिटी के साथ कोई समझौता न करें। झारखंड में सड़कों की गुणवत्ता काफी अच्छी है, इससे राज्य की छवि भी अच्छी बनती है। अच्छी नीति के कारण आज झारखंड निवेशकों के लिए पसंदीदा राज्य बन गया है। निवेशकों को बेहतर सड़क, बिजली, पानी के साथ साथ अन्य आधारभूत संरचना उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेवारी है। हम आधारभूत संरचना के निर्माण में भी निवेश की संभावना पर काम कर रहे हैं। झारखंड में 2014 में स्थिर सरकार आने के बाद से चार वर्षों में 4208 किमी सड़के बनीं हैं। इससे पहले स्टेट हाइवे, एमडीआर अन्य सड़कों की लंबाई 7501 किमी थी, जो अब 11709 किमी हो गयी है। औसतन प्रतिवर्ष 1052 किमी नयी सड़क यानी प्रतिदिन 2.9 किमी सड़क बनायी जा रही है। मुख्यमंत्री शनिवार को इंजीनियर भवन में आयोजित द इंस्टीट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स और पथ निर्माण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एप्लिकेशन आॅफ इपीसी कांट्रैक्ट आॅपर्च्यूनिटी एंड चैलेंजज कार्यक्रम में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन अभियंत्रण क्षेत्र में कौशल विकास एवं ज्ञानवर्धन के लिए लाभकारी साबित होगा। यह सेमिनार झारखंड राज्य में कांट्रैक्ट प्रबंधन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। अभियंताओं का नयी-नयी तकनीक के बारे में ज्ञानवर्द्धन होगा।
इंजीनियर शोध करें और नयी तकनीक लागू करें : मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में तकनीक के मामले में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। तकनीक की मदद से कम समय, कम लागत में अच्छी गुणवत्ता का काम किया जा सकता है। पथ निर्माण में भी नयी-नयी तकनीक आ गयी है। प्लास्टिक और कचरे को रिसाइकिल कर सड़क बनायी जा रही है। शोध करें और नयी तकनीक को लागू करें। उन्होंने कहा कि कांट्रैक्ट के अन्य प्रकार बीओटी, हैम एन्यूटी आदि भी हैं। सेमिनार में यह भी विचार किया जाना आवश्यक है कि इस राज्य के लिए कौन की पद्धति किस योजना के लिए ज्यादा उपयोगी है, ताकि योजना का निर्माण राजकोषीय बजट के अलावा निजी भागीदारी से कराया जा सके। कार्यक्रम में पथ निर्माण विभाग के सचिव केके सोन, द इंस्टीट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स के अध्यक्ष शिशिर कुमार बनर्जी, अभियंता प्रमुख राजबिहारी सिंह समेत अन्य लोग उपस्थित थे।
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