दुर्गापूजा के लिए दुनियाभर में विख्यात पश्चिम बंगाल में मूर्ति निर्माण बाधित ना हो इसके लिए विशेष पहल की गई है। मूर्ति निर्माण के हब कुम्हारटोली में अब थर्मल स्क्रीनिंग की प्रक्रिया शुरू की गई है।
लॉकडाउन के बाद दुर्गा प्रतिमाओं का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। चूंकि इस बार प्रतिमाएं गढ़ने का काम देर से शुरू हुआ है इसलिए समय पर उन्हें तैयार करके पूजा पंडालों में भेजने की मूर्तिकारों के सामने कठिन चुनौती है। इस बीच कुम्हारटोली में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। इसका कारण, लॉकडाउन के बाद विभिन्न जगहों से मूर्तिकारों व कारीगरों का लौटना शुरू हो गया है। ऐसे में सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि अगर कुम्हारटोली में संक्रमण फैल गया तो दुर्गा प्रतिमाओं का निर्माण कार्य ठप पड़ जाएगा। ऐसे में दुर्गापूजा के आयोजन पर ही सवालिया निशान लग जाएगा। कुम्हारटोली से हर साल 1000 से 1200 दुर्गा प्रतिमाएं तैयार होकर जाती हैं। इसी आशंका को देखते हुए कुम्हारटोली के समस्त मूर्तिकारों व कारीगरों की थर्मल स्क्रीनिंग करने का फैसला किया गया है।
मेडिकल बैंक के महासचिव डी आशीष ने बताया-‘हमारा मेडिकल कैंप लग गया है। हमारी पांच सदस्यीय मेडिकल टीम प्रत्येक मूर्तिकार व कारीगर की थर्मल स्क्रीनिंग करेगी। जिनके शरीर का तापमान सामान्य से अधिक पाया जाएगा, उन्हें तुरंत अस्पताल जाने की सलाह दी जाएगी। इसके साथ प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा की भी जांच की जाएगी।’
कुम्हारटोली के मशहूर मूर्तिकार मिंटू पाल ने कहा- ‘यह स्वागत योग्य कदम है। इससे हम निश्चिंत होकर काम कर पाएंगे। दुर्गा प्रतिमाओं के लिए आर्डर मिलने शुरू होने के बाद कुम्हारटोली में चहल-पहल बढ़ी है। बहुत से मूर्तिकार व कारीगर लौट आए हैं। हम बेहद सावधानी बरतकर मूर्तियों का निर्माण कर रहे हैं। मास्क पहनकर काम कर रहे हैं। बार-बार सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं, फिर भी मन में आशंका तो बनी हुई है। नियमित अंतराल पर कोरोना की जांच होते रहने पर हम ज्यादा निश्चिंत होकर काम कर पाएंगे। कुम्हारटोली में 300 से ज्यादा मूर्तिकार और करीब 1500 कारीगर हैं।