भारत के साथ जारी तनाव के बीच अब चीन ने नई चाल चली है। वह अब तिब्बती सैनिकों की भर्ती कर उन्हें ऊंचे इलाकों में युद्ध की खास ट्रेनिंग दे रहा है, ताकि वह भारतीय सेना की स्पेशल फोर्स का मुकाबला कर सके।
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि चीन को भारत की स्पेशल फ्रंटियर फोर्स से बड़ा खतरा नजर आ रहा है। इसलिए वह उसके समकक्ष अपनी टुकड़ी तैयार कर रहा है। बता दें, फ्रंटियर फोर्स में कई तिब्बती सैनिक शामिल हैं और वे पहाड़ों पर लड़ाई में पारंगत हैं। गत वर्ष पूर्वी लद्दाख के पैंगांग इलाके में इसी फोर्स ने चीनी सैनिकों को कब्जा करने से रोका था।
खास अभियान की ट्रेनिंग दी जा रही
चीनी सेना तिब्बती सैनिकों को खास अभियान के लिए भी तैयार कर रही है। तिब्बती सैनिकों को चीनी भाषा सीखने के लिए कहा जा रहा है और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को सर्वेसर्वा मानने के लिए तैयार किया जा रहा है। उसे तिब्बती सैनिकों पर भी भरोसा कम है, इसलिए उनका लॉयल्टी टेस्ट भी कर रहा है। उन्हें अपने धर्मगुरु दलाई लामा से भी सर्वोपरि कम्युनिस्ट पार्टी को मानने को कहा जा रहा है। ट्रेनिंग के बाद चीन इन तिब्बती सैनिकों को एलएसी पर भी तैनात कर सकता है। हालांकि कहना मुश्किल है कि तिब्बती सैनिक किस हद तक चीन का साथ देंगे, क्योंकि दलाई लामा के खिलाफ वे चीन के रवैए को पसंद नहीं करते हैं।
हाल में चीन से लगी सीमा पर 50,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की गई है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसके साथ ही अब एलएसी पर तैनात भारतीय जवानों की कुल संख्या दो लाख हो गई है। यह पिछले साल से 40 फीसदी ज्यादा है। तिब्बत में चीन ने अपनी वायुसेना को नए सिरे से तैनात किया है। इसे देखते हुए भारत की तैयारी भी कम नहीं है।