आजाद सिपाही संवाददाता
नयी दिल्ली। राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले इस पद की एनडीए उम्मीदवार र्द्रौपदी मुर्मू के बारे में कांग्रेस नेता की टिप्पणी से सियासी बवाल मच गया है। कांग्रेस के नेता डॉ अजय कुमार ने श्रीमती मुर्मू के बारे में कहा है कि वह एक सभ्य महिला हैं, लेकिन हमें उन्हें आदिवासी प्रतीक नहीं बनाना चाहिए। द्रौपदी मुर्मू इस देश की एक ह्यबेहद ही दुष्ट विचारधाराह्ण के साथ खड़ी हैंं। वह यहीं नहीं रुके। अजय कुमार ने आगे कहा कि हमारे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हैं। उनके राष्ट्रपति रहते हाथरस की घटना हुई, उन्होंने एक शब्द नहीं बोला। उनके कार्यकाल के दौरान अनुसूचित जातियों की स्थिति और बदतर हो गयी है। बता दें कि अजय कुमार हाथरस की उस घटना का जिक्र कर रहे थे, जिसमें एक दलित युवती की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गयी थी।
डॉ अजय कुमार ने कहा कि प्रतीक बनाना और देश के लोगों को बेवकूफ बनाना मोदी सरकार अच्छी तरह से जानती है। यशवंत सिन्हा एक अच्छे उम्मीदवार हैं। अजय कुमार ने इस चुनाव को ‘राष्ट्र की आत्मा के लिए लड़ाई’ की संज्ञा दे दी। उन्होंने कहा कि यशवंत सिन्हा के पक्ष में सभी समान विचारधारा के लोगों को एक साथ आना चाहिए। हालांकि उनके बयान पर काफी बवाल मचने के बाद उन्होंने पलटी मारी और कहा कि भाजपा ने उनके बयान को तोड़ा-मरोड़ा है।
भाजपा ने घेरा
डॉ अजय कुमार की टिप्पणी पर भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आयी है। पार्टी ने इसे कांग्रेस का आदिवासी विरोधी नजरिया बताया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ट्विटर पर कहा कि कांग्रेस ने श्रीमती मुर्मू का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि अजय कुमार ने द्रौपदी मुर्मू के बारे में कहा है कि वह एक ह्यबुरी विचारधाराह्ण का प्रतिनिधित्व करती हैं, इसलिए हमें उन्हें आदिवासी प्रतीक नहीं बनाना चाहिए। द्रौपदी मुर्मू को पुडुचेरी कांग्रेस ने पहले डमी कैंडिडेट कहा था और अब यह बयान आया है। ऐसे में कांग्रेस ने भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति उम्मीदवार का अपमान किया है।
भाजपा आइटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने कहा कि अगर र्द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति बनती हैं, तो वह आदिवासियों को सशक्त करेंगी। उन्होंने आगे कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए ने आदिवासी समाज की द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार घोषित किया है। यह एक ऐसा कदम है, जो आदिवासी समाज को सशक्त करेगा। कांग्रेस नेता उन्हें बुराई का प्रतीक कहते हैं, सिर्फ इसलिए कि वह एक आदिवासी हैं। यह शर्मनाक है।
कौन हैं द्रौपदी मुर्मू
गौरतलब है कि द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए की उम्मीदवार हैं। इस रेस में वह अब तक सबसे आगे दिख रही हैं। अगर वह निर्वाचित होती हैं, तो देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति होंगी और प्रतिभा पाटिल के बाद दूसरी महिला राष्ट्रपति। ओड़िशा के एक पिछड़े जिले मयूरभंज के एक गांव में रहने वाले एक आदिवासी परिवार में मुर्मू का
जन्म हुआ। परिवार में भीषण गरीबी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई पूरी की। वह 2013 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य बनी थीं। वह 2015 से 2021 तक झारखंड की राज्यपाल रही थीं।
कांग्रेस का यह सोच सामंती मानसिकता का परिचायक : बाबूलाल
द्रौपदी मुर्मू के बारे में कांग्रेस नेता डॉ अजय कुमार की विवादित टिप्पणी पर झारखंड में भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस की यह सोच परिवारवादी सामंती मानसिकता की परिचायक है। आजादी के बाद 54 साल से ज्यादा देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस ने आदिवासियों को क्या दिया, यह दुनिया जानती है। लेकिन आज भाजपा-एनडीए ने आजाद भारत में पहली बार किसी आदिवासी संताल महिला को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाया है, तो इन कांग्रेसियों के पेट में दर्द हो रहा है।