• मुद्दा : जिला बीस सूत्री की बैठक में बालू को लेकर जोरदार तरीके से उठा मामला

रमेश कुमार पांडेय
गुमला (आजाद सिपाही)। बालू के अवैघ खनन, उठाव व बिक्री को लेकर पिछले शनिवार को जिलाबीस सूत्री कार्यान्वयन समिति की बैठक में आखिरकार सवाल उठ ही गया। आजाद सिपाही ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। शनिवार को जिला बीस सूत्री की बैठक की अध्यक्षता करते हुए वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव को सदस्यों की भावनाओं का सम्मान करना पड़ा। अधिकारियों के गोल मटोल जवाब से मंत्री भी कुपित नजर आये। दरअसल में कई सदस्यों ने सवाल उठा दिया कि बालू विकास का महत्वपूर्ण अयवय है। बालू की कमी से बहुत सारी जनकल्याणकारी योजनाएं अटकी हैं। बालू मिल नहीं रहा है। खनन विभाग बताये कि बालू कैसे मिलेगा? विकास योजना कैसे पूरी होंगी? बैठक में इन सवालों का समर्थन किया। सहायक खनन पदाधिकारी राम नाथ राय ने जवाब देते हुए कहा कि एनजीटी लागू है, बालू खनन पर रोक लगी है। जिले में 29 डंपिंग यार्ड खुले हुए हैं। जहां से बालू क्रय किया जा सकता है मगर सदस्य उनके जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आये। अवैध तरीके से हो रहे बालू उठाव और उसकी हो रही कालाबाजारी पर सदस्य सवाल उठा दिये। अधिकारी को फंसते देख उपायुक्त को हस्तक्षेप करना पड़ा। उपायुक्त ने बीच का रास्ता निकालने के लिए सहायक खनन पदाधिकारी, सदर अनुमंडल पदाधिकारी और जिला परिवहन पदाधिकारी को आपस में मिल बैठ कर बालू की कीमत तय करने का निर्देश दिया। अधिकारी ने सदस्यों को बताया कि सात सौ रुपये लेवर चार्ज और परिवहन शुल्क देकर बालू का क्रय मूल्य निर्धारित किया जायेगा। सदस्यों की शिकायत थी कि बालू का डंपिंग यार्ड सभी जगह नहीं हैं। डंपिंग यार्ड दूर हैं। भाड़ा अधिक लग जाता है। सदस्यों की यह भी शिकायत थी कि 2000 से 2200 रुपये प्रति ट्रैक्टर बालू चोरी से मिल रहा है। इससे निजी मकान बनाने वाले बेदम हैं। सरकारी योजनाओं का प्राकलन में तय राशि से अधिक खर्च करना पड़ रहा है।

अवैध खनन पर रोक लगाने को एसडीओ को निर्देश
सदस्यों ने रायडीह, सदर प्रखंड के कसिरा, पतिया और कोयंजारा सहिष्णुता कई स्थानों पर बालू के अवैध खनन और उठाव होने की शिकायत की। शिकायत निवारण के लिए उपायुक्त ने गुमला एसडीओ को छापामारी कर रोक लगाने का निर्देश दिया।

बालू मिलने का प्रचार प्रसार करायें: मंत्री
बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री डॉ रामेशवर उरांव ने बालू की निर्धारित कीमत और मिलने के स्थानों का समाचार पत्र के माध्यम से प्रचार-प्रसार कर जनता को राहत देने का निर्देश अधिकारियों को दिया।

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