जम्मू। जम्मू-कश्मीर आतंकी साजिश मामले में चल रही जांच के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कश्मीर घाटी के तीन जिलों में पांच स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान एजेंसी ने द्वारा बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक डेटा वाले कई डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। एनआईए ने गुरुवार को कहा कि उसने हाइब्रिड आतंकियों और ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) के परिसरों पर एक और दौर की छापेमारी की है। उन्होंने कहा कि ये सभी पाकिस्तान समर्थित प्रतिबंधित संगठनों के संगठनों के सहयोगी हैं।
एजेंसी ने एक बयान में कहा कि इनमें से कुछ नवगठित संगठन, द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) जो लश्कर-ए-तैयबा का छाया संगठन है, उसे सोशल मीडिया पर जम्मू-कश्मीर में हमले करने की धमकियां देते हुए पाया गया है।
एजेंसी ने कहा कि आज शोपियां, अवंतीपोरा और पुलवामा के तीन जिलों में पांच स्थानों पर छापे मारे गए। एनआईए ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट जम्मू और कश्मीर, मुजाहिदीन गजवत-उल-हिंद (एमजीएच), जम्मू और कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स (जेकेएफएफ), कश्मीर टाइगर्स, पीएएएफ और अन्य नए बने संगठनों के समर्थकों और कैडरों के परिसरों पर भी छापे मारे। बयान में कहा गया है कि ये संगठन विभिन्न प्रतिबंधित पाकिस्तान समर्थित संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम), हिज्ब-उल-मुजाहिदीन (एचएम), अल-बद्र और अल-कायदा आदि से संबद्ध हैं।
एजेंसी ने कहा कि तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक डेटा वाले कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए, जिसने एक बार फिर घाटी में आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में ओजीडब्ल्यू को सुर्खियों में ला दिया है और जिसे निरंतर आधार पर नष्ट किया जा रहा है। इन्हें हाइब्रिड आतंकियों के रूप में भी जाना जाता है, जो पाकिस्तान समर्थित आतंकियों को सहायता प्रदान करते हैं।
एनआईए ने जम्मू-कश्मीर में आतंक, हिंसा और हमलों से संबंधित गतिविधियों को फैलाने में विभिन्न संगठनों के कैडरों और ओजीडब्ल्यू की संलिप्तता की जांच के लिए 21 जून, 2022 को एक मामला (आरसी-05/2022/एनआईए/जेएमयू) दर्ज किया था। ये कैडर और कार्यकर्ता चुंबकीय बम, आईईडी, फंड, मादक पदार्थ और हथियार व गोला-बारूद के संग्रह और वितरण में शामिल रहे हैं। एनआईए की जांच से पता चला है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी आतंक को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे थे। इसमें कहा गया है कि कश्मीर घाटी में अपने गुर्गों और कैडरों को हथियार व गोला-बारूद, विस्फोटक, नशीले पदार्थ आदि पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा था। आतंकी साजिश जम्मू-कश्मीर में चिपचिपे बमों, आईईडी और छोटे हथियारों आदि के साथ हिंसक आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए भौतिक और साइबर क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठनों द्वारा साजिश रचने से संबंधित है। पाकिस्तान में अपने आकाओं द्वारा समर्थित संगठन, कृत्यों को अंजाम देने की साजिश रच रहे हैं।
इसमें कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के लिए स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर और जमीनी कार्यकर्ताओं को संगठित करके आतंक और हिंसा की जा रही है।