नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई से जुड़े विधेयक पर विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने की। सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार करने के बजाय केवल कानूनों में संशोधन कर रही है। ऐसे में विपक्ष छात्रों की मांगों और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था के पक्ष में खड़ा रहेगा।
लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार को नए कानून लाने के बजाय परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को दूर करना चाहिए। गोगोई ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार परीक्षा संस्थानों में जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना सुधार संभव नहीं है।
गोगोई ने कहा कि परीक्षा में अनियमितताओं और असफलता के कारण छात्रों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। सरकार को केवल दंड बढ़ाने के बजाय ईमानदार छात्रों का भविष्य प्रभावित करने वाली परिस्थितियों को समाप्त करना चाहिए।
गोगोई ने कहा कि पेपर माफिया, परीक्षा केंद्रों, प्रिंटिंग प्रेस, कोचिंग संस्थानों, आउटसोर्सिंग व्यवस्था और परीक्षा संचालन से जुड़ी खामियों पर व्यापक सुधार आवश्यक है। पूर्व में गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों का अपेक्षित परिणाम भी सामने नहीं आया और दोबारा पेपर लीक की घटनायें हुई।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में भी सरकार ने इसी प्रकार का कानून लाकर दावा किया था कि इससे पेपर लीक पूरी तरह रुक जाएंगे लेकिन दो वर्ष के भीतर फिर बड़े स्तर पर परीक्षा घोटाले सामने आ गए। उनके अनुसार इससे स्पष्ट होता है कि केवल दंड बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य युवाओं को अवसर देना होना चाहिए। किसी भी छात्र के लिए सड़क पर उतरना आसान नहीं होता और ऐसा तभी होता है जब उसके भीतर गहरा असंतोष और निराशा हो। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग किया।
गोगोई ने मांग की कि पूरे मामले में सरकार विशेषकर गृह मंत्रालय सदन में स्पष्ट जवाब दे कि प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के आदेश किस स्तर से दिए गए।

