केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर जश्न और उत्साह का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने एक-दूसरे को बधाइयां दीं और नाचते-गाते हुए अपनी खुशी का इजहार किया। वहां मौजूद छात्रों का कहना है कि उन्होंने आखिरकार यह कर दिखाया है और सरकार द्वारा जिम्मेदारी लिया जाना एक बेहद सकारात्मक कदम है। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेकर सरकार ने अपनी जवाबदेही तय की है और छात्र अपनी सभी मांगें पूरी होने के बाद ही यह प्रदर्शन समाप्त कर अपने घर लौटेंगे।
छात्रों का मानना है कि यह सफलता जवाबदेही तय करने का केवल पहला पड़ाव है। उन्होंने कहा कि हमने सरकार को झुकाया है और अब प्रशासन को यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि जब भी कोई गलत निर्णय लिया जाएगा, वे जवाब मांगने के लिए डटकर खड़े रहेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह तो अभी शुरुआत है और उन्हें धीरे-धीरे हर गलत व्यवस्था को सुधारना है। महंगाई, बेरोजगारी, ईंधन की गुणवत्ता, बढ़ती कीमतें और महिला सुरक्षा जैसे तमाम मुद्दों पर भी अब सरकार से जवाबदेही तय की जाएगी।
जब यह सवाल पूछा गया कि क्या अब प्रदर्शन खत्म हो जाएगा, तो छात्रों ने स्पष्ट किया कि सरकार ने उनकी तीनों मांगों पर हामी भर दी है, इसलिए विरोध प्रदर्शन निश्चित रूप से समाप्त होगा। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि अभी बाकी की दो मांगें केवल कागजों पर हैं। सरकार को नीट परीक्षा के पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना होगा और शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार करने होंगे, तभी यह माना जाएगा कि मांगें पूरी तरह मान ली गई हैं।
जंतर-मंतर पर मौजूद युवाओं ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि उनकी आवाज को मजबूत तरीके से सुना गया है। इससे उन्हें यह अहसास हुआ है कि उनकी आवाज की ताकत क्या है और यह लोकतंत्र में अनसुनी नहीं रह सकती। छात्रों ने चेतावनी दी है कि सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि भविष्य में जब भी कुछ गलत होगा, वे इसी तरह जंतर-मंतर और देश की सड़कों पर सवाल पूछते हुए नजर आएंगे।
इसके साथ ही, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सोनम वांगचुक का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। छात्रों का कहना है कि देश के इतने बड़े वैज्ञानिक ने बच्चों की आवाज उठाने के लिए 26 दिनों तक उपवास रखा और सरकार से सबसे पहले सवाल किया। उनके इसी अटूट हौसले को देखकर छात्रों में भी जोश जागा और उन्हें यह अहसास हुआ कि देश और लोकतंत्र के लिए उन्हें खुद आगे आना होगा। छात्रों का मानना है कि जब सोनम वांगचुक उनके अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं, तो वे अपने हक की खातिर पीछे क्यों हटेंगे।



