पटना। बिहार के चर्चित भरत तिवारी मुठभेड़ मामले की जांच में एक बहुत बड़ा मोड़ आया है, जहां आरा पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। आरा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज ने इस गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि की है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक की पूरी जांच प्रक्रिया में इस गिरफ्तारी को सबसे अहम और बड़ा कदम माना जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से वैज्ञानिक साक्ष्यों, उपलब्ध वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर की गई है, और जांच टीम इन सभी सबूतों का मिलान कर घटना के एक-एक क्रम की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

सामने आए वीडियो साक्ष्यों के आधार पर यह गंभीर दावा किया गया है कि घटना वाले दिन भरत तिवारी ने पुलिस और एसटीएफ टीम के समक्ष कथित तौर पर आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद एसटीएफ जवान अक्षय कुमार ने कथित तौर पर उन पर सबसे पहली गोली चलाई। आरोप है कि पहली गोली लगने के बाद जब भरत तिवारी जमीन पर गिर पड़े, तब उन्हें तीन और गोलियां मारी गईं, जिससे मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि, इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच के निष्कर्षों पर ही निर्भर करेगी। यदि जांच के दौरान ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पूरा मामला कथित फर्जी मुठभेड़ और सुनियोजित हत्या जैसे बेहद गंभीर कानूनी दायरे में आ सकता है, जिसके मद्देनजर एजेंसियां हर पहलू से तहकीकात कर रही हैं।

इस मामले में तब अचानक तेजी आई जब बीते 24 जुलाई को मृतक भरत तिवारी के परिजनों ने पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और इसमें संलिप्त सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। मुख्यमंत्री की ओर से परिजनों को न्याय और उचित कार्रवाई का पूरा भरोसा दिए जाने के बाद से ही जांच प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ी थी। एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी को मृतक के परिजनों ने न्याय की दिशा में एक शुरुआती और महत्वपूर्ण कदम करार दिया है, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल एक जवान की गिरफ्तारी से संतुष्टि नहीं मिलने वाली है। परिजनों ने मांग की है कि इस मुठभेड़ में शामिल अन्य तमाम पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका की भी गहन जांच की जाए और उनके खिलाफ भी हत्या का मामला दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

गौरतलब है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में प्रशासनिक स्तर पर पहले भी गाज गिर चुकी है, जिसके तहत तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार को उनके पद से हटाया जा चुका है और तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को भी लाइन हाजिर किया जा चुका है। इन तमाम प्रशासनिक और पुलिसिया कार्रवाइयों के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि जांच एजेंसियां इस अभियान में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों की संलिप्तता की भी गहराई से जांच कर रही हैं और आगे भी कई बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

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