वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि गाजा पट्टी में सक्रिय हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण (हथियार छोड़ने) को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता हो गया है। उनके अनुसार, इस समझौते के तहत गाजा में चरणबद्ध तरीके से हथियार हटाए जाएंगे और इसके समानांतर इजराइली सेना भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वहां से वापस जाएगी। ट्रंप ने इस समझौते को गाजा में स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह समझौता उनके नेतृत्व वाले “बोर्ड ऑफ पीस” और हमास के बीच मिस्र, कतर और तुर्किये की मध्यस्थता से संभव हुआ है। उन्होंने इस प्रक्रिया में सहयोग देने वाले इन तीनों देशों और अपनी वार्ता टीम का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। रिपोर्टों के अनुसार, यह समझौता ट्रंप की 20 सूत्री गाजा शांति योजना का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हमास ने समझौते की शर्तों पर सहमति जताई है, लेकिन इजराइल और कई पश्चिमी देशों के अधिकारियों को अब भी संदेह है कि संगठन अपने वादों को पूरी तरह निभाएगा। समझौते के तहत हमास को छह से आठ महीनों के भीतर अपने भारी और हल्के हथियार सौंपने होंगे, सुरंग नेटवर्क, हथियार निर्माण केंद्रों और गोदामों की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसके बाद हथियारों को राष्ट्रीय समिति के नियंत्रण में रखा जाएगा।
योजना के अनुसार, गाजा में एक नई फिलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की जाएगी, जिसके अधीन नई पुलिस व्यवस्था विकसित की जाएगी। इजराइल की सुरक्षा एजेंसी की मंजूरी के बाद प्रशिक्षित फिलिस्तीनी पुलिस बल को राष्ट्रीय समिति के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। समझौते में यह भी प्रावधान है कि हमास विरोधी अन्य सशस्त्र गुटों से भी हथियार वापस लिए जाएंगे, जबकि हमास के लड़ाकों को सामान्य जीवन में लौटने का अवसर दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, इस समझौते को अंतिम रूप देने में मिस्र, कतर और तुर्किये ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष रूप से मिस्र की खुफिया एजेंसी के प्रमुख हसन रशाद ने हमास नेतृत्व के साथ लगातार संवाद बनाए रखा। वहीं, रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ईरान समर्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) इस समझौते से असहज है और उसने हमास से वार्ता में जल्दबाजी नहीं करने की सलाह दी थी।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर कहा कि इस समझौते से गाजा में नई फिलिस्तीनी सरकार के गठन का रास्ता खुलेगा, जो बोर्ड ऑफ पीस के सहयोग से काम करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे गाजा का उपयोग भविष्य में आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं हो सकेगा और क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, समझौते के क्रियान्वयन को लेकर इजराइल की ओर से अभी भी सतर्क रुख अपनाया गया है और इसके सफल कार्यान्वयन पर कई पक्षों की नजर बनी हुई है।

