हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा पर बनी सहमति, ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति के रास्ते साफ

मेलबर्न। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने एक संयुक्त बयान जारी कर पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बिगड़े हालातों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। दोनों देशों ने माना कि इस संकट से वैश्विक ऊर्जा, संसाधनों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला (सप्लाई चेन) के साथ-साथ कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, दोनों व्यापक सामरिक साझेदार देशों ने एक स्वतंत्र, मुक्त और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए नियम आधारित व्यापार व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है।

दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देते हुए असैन्य परमाणु सहयोग समझौते के तहत अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के मानकों पर भारत को ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम निर्यात की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया को भारत के लिए एलएनजी (LNG) का और भारत को ऑस्ट्रेलिया के लिए तरल ईंधन का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बताते हुए दोनों देशों ने द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार को तेजी से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

प्रशांत द्वीपीय देशों की ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए दोनों पक्षों ने कोयला, डीजल, प्राकृतिक गैस और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की है। भारत के ‘ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस’ की सराहना करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने निम्न-कार्बन ईंधन और ऊर्जा संक्रमण के क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि की दिशा में काम करने की बात दोहराई।

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