रांची: झारखंड सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए छोटे बालू घाटों को पंचायतों के हवाले कर दिया है। साथ ही नीलाम नहीं हुए 170 बालू घाटों को जेएसएमडीसी को सौंपा है। नीलाम हुए घाटों को अब अवधि नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। अवधि समाप्त होने पर इसका संचालन जेएसएमडीसी करेगा। कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को मुहर लगायी गयी। इसके अलावा कैबिनेट ने 11 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की। उद्योग एवं खान-भूतत्व विभाग के सचिव सुनील वर्णवाल ने बताया कि बालू घाटों को पहली बार दो श्रेणियों में बांटा गया है। छोटे बालू घाट पूरी तरह से नि:शुल्क रहेंगे और करमुक्त रहेंगे। यहां से कोई भी बालू निकाल सकेगा, लेकिन बालू को जमा नहीं किया जा सकेगा। उत्खनन के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति की जरूरत नहीं होगी।
श्री वर्णवाल ने बताया कि उद्योग खान एवं भूतत्व विभाग के प्रस्ताव खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन अधिनियम 1957 की धारा 15 के अंतर्गत झारखंड स्टेट सैंड माइनिंग पॉलिसी 2017 को अधिसूचित करने की स्वीकृति प्रदान की गयी। इसी के तहत बालू घाटों को दो श्रेणी में बांटा गया है। बताया कि पंचायतें बालू घाटों के मेंटेनेंस के लिए मामूली दर चार्ज करेगी, लेकिन इस दर का निर्धारण भी राज्य सरकार द्वारा किया जायेगा। अब अधिक चार्ज नहीं लिया जा सकेगा। इसके अलावा छोटे घाटों से बालू उत्खनन मशीन के माध्यम से नहीं होगा। बताया कि द्वितीय श्रेणी में वाणिज्यिक उपयोग के लिए बड़े बालू घाटों से जेएसएमडीसी (झारखंड राज्य खनिज विकास निगम) के माध्यम से खनन और बिक्री का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जेएसएमडीसी एनजीओ और अन्य संगठनों को बालू खनन का ठेका देगा। जितनी बिक्री जेएसएमडीसी कर पायेगा, उतना ही खनन कार्य होगा। बरसात के मौसम को देखते हुए नियमानुसार स्टॉक रखने का भी प्रावधान किया गया है। खान सचिव ने बताया कि बालू की बिक्री आॅनलाइन होगी और पैसा जमा करने के बाद जेएसएमडीसी की ओर से परमिट लेकर चालान और डिस्पैच का काम पूरा किया जायेगा। बताया कि इसके लिए जेएसएमडीसी को 15 प्रतिशत राशि दी रखेगा, शेष राशि निगम राज्य सरकार के खाते में जमा करायेगा। इसके अलावा बालू खनन में टेक्नोलॉजी का भी समुचित ध्यान रखा गया है, जिसके तहत जीपीएस ट्रैकिंग, सीसीटीवी, सर्विलांस सिस्टम और आॅनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था होगी।
श्री वर्णवाल ने बताया कि राज्य में अभी 170 बालू घाटों की बंदोबस्ती नहीं की जा सकेगी, जबकि जिन 440 घाटों की बंदोबस्ती हो चुकी है, इन घाटों की बंदोबस्ती की अवधि समाप्त होने या निरस्त करने के बाद निगम की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जायेगी। फिलहाल निगम को पांच वर्षों के लिए यह जिम्मेवारी सौंपी गयी है, लेकिन एक वर्ष बाद कार्यों की समीक्षा होगी।
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