कोडरमा। जिले के इंदरवा लोकाई वन्य प्राणी आश्रयणी क्षेत्र में पिछले ढाई दशक से चल रहे अवैध उत्खनन के खिलाफ गुरुवार को कोडरमा जिला प्रशासन और वन विभाग ने संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई की। इस क्षेत्र में वर्षों से संचालित दर्जनों ब्लू स्टोन की खदानों को पुलिस, प्रशासन और वन विभाग की टीम ने भारी नुकसान पहुंचाया। खदानों के बाहर लगे जनरेटर, कंप्रेसर मशीन, वाटर डिलिवरी पाइप, तार आदि को जब्त कर लिया गया और खदानों के बाहर बने कटेज को ध्वस्त कर दिया गया। यहां लगभग 100 से अधिक खदानें अवैध रूप से संचालित हैं। कार्रवाई के लिए जिला स्तर से कमलेंद्र कुमार सिन्हा को दंडाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया था। वहीं टीम मेेंं वन्य प्राणी प्रमंडल हजारीबाग के वन प्रमंडल पदाधिकारी दिलीप कुमार यादव, वन प्रमंडल पदाधिकारी कोडरमा सूरज कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी प्रभात कुमार बरदियार, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अनिल शंकर, खनन पदाधिकारी मिहिर सिलकर समेत कई पुलिस और विभागों के अधिकारी शामिल थे। छापेमारी से पूर्व वन विभाग के गेस्ट हाउस में पदाधिकारियों ने काफी देर तक मंत्रणा की और तैयारी का जायजा लिया। इसके बाद दो जेसीबी मशीन और टैक्टर आदि के साथ भारी संख्या में पुलिस एवं वन विभाग के जवानों के साथ खदान जाने वाली लोकाई मोड के पास पहुंचे। यहां कोडरमा-गिरिडीह मुख्य मार्ग पर भी पुलिस बल तैनात किये गये।
इस कार्य में 200 से अधिक पुलिस के जवान और महिला पुलिस की टीम को लगाया गया था। अभियान में कोडरमा, डोमचांच, ढाब, नवलशाही थाना क्षेत्र के पदाधिकारियों और जवानों को भी लगाया गया था। अभियान के दौरान यहां की खदानें 200 से 300 फीट गहरी पायी गयी। सभी खदानें अंडर ग्राउंड थी। खदानों के बाहर पत्थर और मलबे का ढेर लगा था। कार्रवाई के दौरान पुलिस के जवानों ने पूरे इलाके की घेराबंदी की थी। वहीं, सड़क और गांव के सभी एंट्री पइंट में जवानों की मोर्चाबंदी थी। इससे पहले भी कई बार पुलिस प्रशासन ने यहां चल रहे अवैध खदानों के खिलाफ कार्रवाई की थी, लेकिन ग्रामीणों के जबरदस्त विरोध में पथराव आदि के कारण पुलिस प्रशासन को कई बार पीछे हटना पड़ा था। लेकिन इस बार तैयारी काफी जबरदस्त थी।
इस कारण ग्रामीण किसी तरह की विरोध प्रदर्शन नहीं कर पाये। पुलिस टीम वहां से जनरेटर, कंप्रेसर पाइप आदि को जब्त कर लाई है। इस अभियान में दो बड़े जेसीबी को लगाया गया था। हालांकि गांव के एक तरफ ग्रामीणों की भीड़ घटना के विरोध में जमा थी, लेकिन सशस्त्र बल की मोर्चाबंदी को देख लोग कोई हरकत नहीं कर पाये। हालांकि अभियान के दौरान किसी भी खदान को ध्वस्त नहीं किया गया है। ऐसे में संभावना है कि बाद में फिर यहां लोग अवैध उत्खनन कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि इस इलाके में चमकीले ब्लू स्टोन पत्थर की बड़े पैमाने पर माइनिंग होती है। इस पत्थर का उपयोग आभूषण में किया जाता है। जयपुर की पत्थर मंडी में इसकी काफी डिमांड है। धंधे में शामिल लोग पत्थरों का उत्खनन कर बड़े पैमाने पर जयपुर, कोलकाता और इसके आसपास भेजने का काम करते हैं।
अवैध उत्खनन पर रोक में सामाजिक-आर्थिक परिवेश बाधक : दिलीप
वन्य प्राणी प्रमंडल हजारीबाग के वन प्रमंडल पदाधिकारी दिलीप कुमार यादव ने मौके पर कहा कि अवैध उत्खनन पर पूर्णत: विराम लगाने में यहां का सामाजिक-आर्थिक परिवेश बाधक बना हुआ है। कई बार अवैध उत्खनन को बंद करने का प्रयास हुआ पर बंद नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि हर कीमत पर अवैध उत्खनन बंद होगा। इसकी शुरूआत कर दी गयी है। अगले चरण में अवैध खदानों को भर दिया जायेगा।
विभाग के अनुसार 27 साल से
चल रहा है अवैध उत्खनन : वन विभाग के अनुसार पिछले 27 साल से यहां पर अवैध उत्खनन का कार्य चल रहा है। वर्ष 1991 में अवैध उत्खनन से संबंधित मामला विभाग में दर्ज हुआ। जबकि अवैध उत्खनन की शुरूआत अस्सी के दशक से हीं हो गयी थी। आज की तारीख में छोटे बड़े खदानों की संख्या तकरीबन दो सौ से उपर है। अबतक 192 मामले दर्ज किये गये हैं और 500 नामजद अभियुक्त बनाये गये हैं।
एनजीटी से जुड़ा है मामला : अवैध उत्खनन और कार्रवाई का उक्त पूरा मामला और कार्रवाई नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल से जुड़ा हुआ है। सत्यप्रकाश बनाम भारत सरकार के इस मामले में विभाग ने यह हलफनामा दिया है कि कोडरमा और हजारीबाग जिले में किसी प्रकार का अवैध उत्खनन नहीं हो रहा है। परंतु अब उक्त हलफनामा ही विभाग के गले की हड्डी बन गयी है। इसी आलोक में गुरूवार को उक्त कार्रवाई की गयी है। इधर साल 2003 और 2010 में राज्य सरकार ने उक्त इलाके को वन्य प्राणी आश्रयणी से अलग करने का प्रस्ताव लिया था जो केंद्र सरकार के स्तर पर लम्बित है। यह इलाका साल 2003 में प्रादेशिक वन प्रमंडल कोडरमा से कटकर वन्य प्राणी प्रमंडल में शामिल किया गया था जबकि उस इलाके में कोई वन्य प्राणी नहीं रहता है।