नयी दिल्ली : असम में फर्जी मुठभेड़ों में सशस्त्र बलों और राज्य पुलिस के संलिप्त रहने का आरोप लगाते हुए दायर की गई एक जनहित याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़़ की सदस्यता वाली एक पीठ ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) एवं अन्य को भी नोटिस जारी किया है. पीठ ने 4 कोर के जनरल आफिसर कमांडिंग और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के एकीकृत कमान के ऑपरेशनल ग्रुप के प्रमुख तथा असम के चिरांग जिला में पदस्थ सीआरपीएफ कमांडेंट से भी जवाब मांगा. केंद्रीय बलों के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का जिक्र जनहित याचिका में किया गया है. यह याचिका पूर्व नौकरशाह ई ए एस शर्मा ने दायर की है.
यह जनहित याचिका सीआरपीएफ के महानिरीक्षक (आईजी) रजनीश राय द्वारा अप्रैल 2017 में दर्ज एक रिपोर्ट पर आधारित है. इसमें आरोप लगाया गया है कि पिछले साल 30 मार्च को असम के सिमलगुरी गांव में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (सोंगबीजीत) के दो संदिग्ध सदस्यों की सुनियोजित फर्जी मुठभेड़ में हत्या की गई. शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजालवेस पेश हुये उन्होंने अखबार में प्रकाशित खबरों का हवाला दिया, जिनमें दावा किया गया था कि राय ने फर्जी मुठभेड़ के कुछ गवाहों से मुलाकात की थी. पूर्व नौकरशाह ने थल सेना, असम पुलिस, सीआरपीएफ और एसएसबी की संयुक्त कार्रवाई में चिरांग जिला के सिमलगुरी गांव में 30 मार्च 2017 को अंजाम दी गई इस घटना की गहन जांच की मांग की है. इस घटना में एनडीएफबी (एस) के दो संदिग्ध सदस्य मारे गए थे.
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