रांची. भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल और धर्मांतरण आरक्षण बिल के विरोध में आदिवासी संघर्ष मोर्चा द्वारा एक सेमिनार का आयोजन रविवार को मोराबादी स्थित पाही पैलेस में किया गया। इस सेमिनार में प्रमुख शिक्षाविद डॉ. करमा उरांव ने कहा कि सरकार फूट डालो और राज करो की नीति पर चल रही है।

दोनों कानून झारखंड के आदिवासी के लिए मौत का फरमान है

उन्होंने कहा- एक ओर सरकार ईसाई आदिवासी और सरना आदिवासी के बीच मतभेद उत्पन्न करने के लिए धर्मांतरण आरक्षण बिल लाई है। वहीं, दूसरी ओर आदिवासी मूलवासियों को बेघर करने के लिए भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन किया है। यह दोनों कानून झारखंड के आदिवासी के लिए मौत का फरमान है। उन्होंने कहा- इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

18 को राजभवन के समक्ष महाधरना

प्रेम शाही मुंडा ने कहा कि रघुवर सरकार एक-एक कर संविधान में छेड़छाड़ और आदिवासियों पर हमले कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पूरी तरह से आदिवासी मूलवासी के विरोध में काम कर रही है। इसका डटकर मुकाबला करना होगा। इस मौके पर कई कार्यक्रमों की घोषणा की गई, जिसमें 18 अगस्त को राजभवन के समक्ष महाधरना और 22 अक्टूबर को रांची में आदिवासी क्रांति महासभा रैली का आयोजन करने का निर्णय लिया गया।

Share.

Comments are closed.

Exit mobile version