गुमला। विकास भवन स्थित आकांक्षा सभागार में जनजातीय परामर्शदातृ परिषद की उप समिति की बैठक हुई। इसमें ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा सहित उप समिति के सदस्य के रूप में विधायक ताला मरांडी, गुमला विधायक शिवशंकर उरांव, मांडर विधायक गंगोत्री कुजूर, रतन तिर्की सहित स्थानीय जनजातीय समुदाय के बुद्धिजीवी तथा प्रतिनिधि शामिल रहे। उप समिति ने जनजातीय समुदाय की घटती आबादी पर चिंता जाहिर की। साथ ही इसके कारणों पर विचार किया। कहा गया कि इसके समाधान के लिए प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। जनजातीय समुदाय की घटती आबादी के कारणों की तलाश के लिए बनी उपसमिति के सदस्यों ने कहा आदिवासियों की घटती जनसंख्या चिंतनीय है, इस पर जांच पड़ताल करने की आवश्यकता है। जनजातीय समुदाय के विकास के लिए सरकार की तरफ से कई योजनाएं संचालित हैं। उसका लाभ सही लोगों तक पहुंचाने के लिए कारगर कदम उठाना होगा। उप समिति ने 17 अगस्त को जिला स्तर पर प्रस्तावित जनजातीय परामर्शदातृ की बैठक में अधिक से अधिक जनजातीय समुदाय के बुद्धिजीवियों की भागीदारी एवं सुझाव आमंत्रित करने का निर्देश जिला प्रशासन को दिया।
बैठक में उपसमिति के सदस्यों के अलावा जिला परिषद अध्यक्ष किरण माला बाड़ा, उपविकास आयुक्त नागेंद्र सिन्हा सहित प्रशासनिक और पुलिस पदाधिकारी, पूर्व विधायक कमलेश उरांव, नगर परिषद अध्यक्ष दीपनारायण उरांव, उपाध्यक्ष कलीम अख्तर, जिला परिषद सदस्य प्रखंड प्रमुख सहित जनजातीय समुदाय के बुद्धिजीवी मौजूद थे।

घटती आबादी का प्रमुख कारण पलायन: जन प्रतिनिधि
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि आजादी के बाद गुमला में जनजातीय समुदाय की आबादी में कमी आयी है। उसका एक महत्वपूर्ण कारण यहां के जनजाति समुदाय के लोगों का रोजगार की तलाश में पलायन है। जनगणना कर्मी और उसकी एजेंसी के लोगों की लापरवाही भी आंकड़ा कम होने की प्रमुख वजह है। जनजातीय समुदायों की आबादी कम होने के अन्य कारणों में जन्म और मृत्यु दर दोनों की अधिकता, आदिवासी महिलाओं द्वारा गैर आदिवासियों के साथ ब्याह, मानव तस्करी शामिल हैं। उन्होंने साथ ही जनजातीय क्षेत्रों में जन जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत बतायी। साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, अशिक्षा, रोजगार के अवसरों का अभाव, नशापान, सामाजिक कुरीति, कुपोषण उपचार, रोजी रोजगार की व्यवस्था आदि के लिए स्थानीय स्तर पर पहल करने की जरूरत बतायी गयी। सरकारी मशीनरी-प्रशासनिक उदासीनता, लापरवाही के मामले पर त्वरित र्कारवाई करने संबंधी व्यवस्था करने की मांग जनतिनिधियों द्वारा की गयी।

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