रांची। वर्ष 2015-16 में फर्जी तरीके से नियुक्त 53 शिक्षकों की बर्खास्तगी के आदेश के कुछ दिन बाद फिर उस आदेश को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा स्थगित कर दिया गया है। शिक्षकों की सेवा पुन: बहाल करने के मामले में जांच तेज हो गयी है। झारखंड विधानसभा के बीते सत्र के दौरान इसे लेकर खरसांवा विधायक दशरथ गागराई द्वारा उठाये गये सवाल के बाद सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। सरकार के आदेश पर कोल्हान के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक अरविंद विजय बिलुंग की अध्यक्षता में पूर्वी सिंहभूम एवं पश्चिमी सिंहभूम के जिला शिक्षा पदाधिकारियों समेत तीन सदस्यीय टीम गठित कर पूरे मामले की जांच करायी जा रही है।
जांच के दौरान कई जरूरी दस्तावेज जांच कमेटी के समक्ष पेश नहीं हो पाये, जिस कारण शिक्षा विभाग ने एक हफ्ते के भीतर सभी आवश्यक कागजात उपस्थापित करने का आदेश दिया है। जांच कमेटी के सदस्य एवं पश्चिमी सिंहभूम के जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रदीप कुमार चौबे ने कहा कि 53 शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है। आखिर किन परिस्थितियों में न्यूनतम योग्यताधारी एवं गैर पारा कोटे में पारा शिक्षकों की नियुक्ति की गयी। इसके लिए कौन दोषी है। उन्होंने कहा कि जल्द जांच पूरी की जायेगी तथा विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी जायेगी।
मालूम हो कि कई दौर की जांच एवं जिला शिक्षा स्थापना समिति के निर्णय के आलोक में बीते तीन जुलाई को 53 शिक्षकों को बर्खास्त किया गया था, फिर इस आदेश के एक हफ्ते बाद ही शिक्षा विभाग ने इस आदेश को स्थगित करते हुए उन शिक्षकों को बर्खास्तगी के आदेश को स्थगित कर दिया। इसमें पारा शिक्षक होते हुए भी अपनी वास्तविकता छिपाकर 26 शिक्षक गैर पारा कोटे में नियुक्त हुए थे, उन्हें बर्खास्त किया गया था, जबकि 27 शिक्षकों को नियुक्ति के आवश्यक अंक से कम अंक पर नियुक्त किये जाने के कारण सेवा समाप्त करने का आदेश दिया गया था। ये सभी शिक्षक इंटर प्रशिक्षित शिक्षक पद वर्ग एक से पांच के लिए बहाल हुए थे।