धनबाद। आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर जगह बदलने में माहिर शॉर्प शूटर नंदकिशोर सिंह उर्फ बबलू सिंह उर्फ रूना सिंह उर्फ मामा को गुरुवार को भोजपुर में दबोचा गया। धनबाद के विधायक संजीव सिंह के करीबी रंजय सिंह की हत्या के बाद से वह झारखंड पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। रंजय हत्याकांड के डेढ़ साल बाद भी धनबाद पुलिस का अनुसंधान मामा तक सिमटा हुआ है। पुलिस की जांच रघकुल के करीबी बबलू सिंह उर्फ मामा के इर्द-गिर्द ही घूमती रही। लेकिन मामा पुलिस के हाथ नहीं आया। सच्चाई यह भी है कि अब तक पुलिस मामा को इस केस में अप्राथमिक अभियुक्त तक नहीं बना सकी है। नीरज सिंह हत्याकांड में विधायक संजीव सिंह सहित 11 आरोपी जेल में बंद हैं, लेकिन पुलिस रंजय सिंह हत्याकांड में मामा का सत्यापन तक नहीं कर सकी। अब मामा की गिरफ्तारी के बाद धनबाद पुलिस रंजय हत्याकांड का खुलासा कर सकती है। धनबाद पुलिस मामा को धनबाद लाने के लिए भोजपुर रवाना हो गयी है।
झारखंड एसटीएफ की टीम ने जाल बिछाकर पकड़ा
विगत डेढ़ वर्ष तक लुकाछुपी का खेल खेलने वाले झारखंड के धनबाद जिले के मोस्टवांटेड नंदकुमार सिंह को भोजपुर के चैरी थाना क्षेत्र के बेरथ गांव से गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी गिरफ्तारी गुरुवार को उस समय हुई जब वह बच्चों को गांव के ही एक निजी स्कूल में छोड़ने गया था। वहां पूर्व से ही स्थानीय थाना सहित झारखंड से आयी एसटीएफ की टीम ने जाल बिछा रखा था। धनबाद के भाजपा विधायक संजीव कुमार सिंह के करीबी रंजय कुमार सिंह की हत्या में झारखंड पुलिस को नंदकुमार सिंह की तलाश थी। झारखंड पुलिस द्वारा उस पर इनाम भी रखा गया था।
कई नामों से जाना जाता है शॉर्प शूटर नंदकिशोर
कई नामों के साथ जगह बदलने में माहिर था नंदकुमार। बार-बार जगह बदल कर पुलिस को चकमा देने वाला शॉर्प शूटर एक नाम नहीं, बल्कि कई नामों से जाना जाता है। 40 वर्षीय नंदकुमार सिंह, बबलू सिंह, मामा जी सहित कई नाम हैं। धनबाद पुलिस के अनुसार आरा के कोइलवर जिले का रहने वाला बबलू सिंह उर्फ मामा रघुकुल में कारोबार के कुछ हिस्से का हिसाब-किताब रखता था। इससे पूर्व भी वह आर्म्स एक्ट के एक मामले में जेल जा चुका है। मुकेश सिंह के काफिले से मामा को बैंक मोड़ में हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया था। रंजय सिंह हत्याकांड के बाद से वह फरार बताया जाता रहा है।
शोले की आंच में तप रहे सिंह मेंशन और रघुकुल
29 जनवरी 2017, इसी दिन धनबाद की धरती पर एक चिंगारी उठी, जिसने देखते ही देखते शोले का रूप ले लिया। डेढ़ साल बीतने के बावजूद आज भी शोले की आंच में धनबाद का दो परिवार सिंह मेंशन और रघुकुल तप रहा है। झरिया विधायक संजीव सिंह के करीबी रंजय सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी। रंजय हत्याकांड के दो माह बाद पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह और उनके तीन समर्थकों को स्टील गेट के पास गोलियों से भून दिया गया। नीरज सिंह की हत्या को रंजय सिंह की हत्या के प्रतिशोध से जोड़ कर देखा जाता है। पुलिस दावा करती रही है कि रंजय सिंह की हत्या का बदला लेने के लिए ही नीरज सिंह की हत्या की गयी। हालांकि पुलिस के पास अब तक कोई ऐसा प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि रंजय सिंह की हत्या किसने और किसके इशारे पर की गयी। पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट रंजय की पत्नी रूमी देवी ने मुख्यमंत्री जनसंवाद में शिकायत की। बीते दिनों झारखंड विधानसभा में विधायक संजीव सिंह ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए भेदभाव का आरोप लगाया। रूमी ने हाइकोर्ट में 19 जनवरी को याचिका दायर कर रंजय सिंह हत्याकांड की सीबीआइ जांच कराने की मांग की।