रांची। जकार्ता में चल रहे एशियन गेम्स में झारखंड की तीरंदाज बेटी मधुमिता गोल्ड मेडल से सिर्फ एक कदम दूर है। मंगलवार को तीरंदाजी कंपाउंड में दक्षिण कोरिया की टीम से फाइनल में भिड़ंत होनी है। भारत की ओर से कंपाउंड महिला टीम में तीन खिलाड़ी हैं, जिनमें से एक मधुमिता भी है।
फाइनल में पहुंच कर इस टीम ने रजत पदक पक्का कर लिया है। मधुमिता के पिता जितेंद्र नारायण सिंह ने ईश्वर से कामना की है कि उनकी बेटी भारत के लिए गोल्ड मेडल जीत कर लौटे। मधुमिता, रामगढ़ के घाटो स्थित वेस्ट बोकारो की रहनेवाली है। उसने साल 2008 में आॅर्चरी के क्षेत्र में कदम रखा और कुछ वर्षों के भीतर ही राष्ट्रीय फलक पर अपना जलवा बिखेरने लगी। साल 2010 में झारखंड के पूर्व मंत्री सुदेश महतो की पत्नी द्वारा संचालित बिरसा मुंडा आॅर्चरी एकेडमी में मधुमिता ने कंपाउंड डिवीजन में भाग लेना शुरू किया।
मधुमिता का तीरंदाजी प्रेम : अब तक मधुमिता करीब दो दर्जन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी है। उसने अब तक 50 से ज्यादा पदक जीते हैं। 2013 में मंगोलिया से अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में मधुमिता ने कदम रखा। अब तक मधुमिता 12 अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी है।
सीएम रघुवर ने दी शुभकामना : झारखंड की शान, बेटी मधुमिता को तीरंदाजी में महिला कंपाउंड टीम स्पर्द्धा के फाइनल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। देश को आप पर गर्व है।
– रघुवर दास, मुख्यमंत्री
तुम्हें ‘गोल्डेन गर्ल’ बोलेंगे : सुदेश महतो
झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने मधुमिता से वीडियो कॉल के जरिये बात की। सुदेश महतो ने कॉल कर पूछा कि मंगलवार के लिए तैयारी, तो मधुमिता ने जवाब दिया कि चल रही है सर। उसके बाद सुदेश महतो ने कहा कि कल सिर्फ गोल्ड चाहिए। मधुमिता ने जवाब दिया हां सर। उन्होंने बधाई देते हुए कहा कि कल से हम लोग तुम्हें गोल्डेन गर्ल बोलेंगे।