घाघरा। प्रखंड मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित सुदूरवर्ती गांव घोड़ापत्थर निवासी जलेश्वर असुर की हत्या उसके ही चचेरे भाई सुनील असुर ने कर दी। कहा जा रहा है कि पत्नी संग चचेरे भाई को देख, उसने डंडा एवं टार्च से उसकी पिटाई कर दी, जिससे जलेश्वर असुर की मौत हो गयी। इस संबंध में मृतक कि पत्नी रमणी असुर और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि जलेश्वर ने अपने चचेरे भाई सुनील असुर को पत्नी रमणी असुर के साथ आपत्ति जनक स्थिति में देखा। इसके बाद जलेश्वर और सुनील के बीच कहा सुनी हो गयी। इस पर सुनील असुर ने अपने भाई को गांव से दूर ले जाकर पिटाई कर दी, जिससे जलेश्वर गंभीर रुप से घायल हो गया। घायल जलेश्वर का समुचित इलाज नहीं होने के कारण मौत हो गयी। घटना की सूचना ग्रामीणों द्वारा घाघरा थाना को दी गयी। घाघरा थाना प्रभारी मणिलाल राणा घटना स्थल पर पहुंचे और शव को कब्जे में ले लिया। चौकीदार सोमा उरांव, अरतुस लकड़ा, घुड़ा उरांव, जगरो उरांव के सहयोग से शव को घटना स्थल से लाया गया। इधर शव उठाने पहुंचे 4 चौकीदारों के समक्ष ही भाई के हत्या का आरोपी सुनील असुर ने आत्मसमर्पण किया। जिसे शव के साथ ही घाघरा थाना लाया गया।
घटना के संबंध में बताया जाता है कि मृतक जलेश्वर की पत्नी रमणी असुर के साथ सुनील असुर साथ हमेशा लगा रहता था। इसी बात को लेकर कहासुनी हो गयी। जिसके बाद घटना घटी। जिसके बाद परिजनों द्वारा मारपीट की सूचना मिलने पर घायल जलेश्वर को घर लाया गया।
जहां झोलाछाप डॉक्टरों से उसके घर में ही इलाज कराया गया। लेकिन शरीर में अंदरूनी भाग में गंभीर चोट पहुंचने के कारण 4 दिन के बाद जलेश्वर ने दम तोड़ दिया। मालूम हो कि घोड़ापत्थर घाघरा प्रखंड के अति उग्रवाद प्रभावित बिमरला पंचायत के एक छोटा सा गांव है। जो घने जंगलों के बीच पहाड़ी तटिय पर बसा आदिम जनजातियों का गांव है। जहां यातायात के साधन व सुगम पथ का घोर अभाव है। जिसके कारण जलेश्वर का समुचित इलाज नहीं हो सका। साथ ही साथ इस पर्वतीय क्षेत्र के गांव में कभी भी किसी व्यक्ति की मृत्यु व अन्य अपराधियों में पुलिस पदाधिकारी गांव की ओर रुख न कर चौकीदार के माध्यम व ग्रामीणों के माध्यम से शव को थाना तक लाने की व्यवस्था बनाते हैं। ज्ञात हो कि बॉक्साइट उत्खनन कंपनी हिंडाल्को का एक बड़े भूभाग में आदिम जनजातियों के गांव के समीप बॉक्साइट का उत्खनन बड़े पैमाने पर किया जाता है। बॉक्साइट उत्खनित कंपनी को उत्खनन क्षेत्र के पोषक क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिक्षा सड़क पर आवागमन के साधन उपलब्ध कराना है। शायद चिकित्सा की समुचित व्यवस्था क्षेत्र में लोगों के लिए कराये जाने से शायद आज जलेश्वर की मौत नहीं होती।ं
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