नई दिल्लीः फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे को लेकर रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को एक और खत लिख कर अपनी सफाई दी है। अंबानी ने कहा है कि उनके प्रति दुर्भावना रखने वाले कुछ निहित स्वार्थी तत्वों और कार्पोरेट प्रतिद्वंद्वियों ने इस डील पर कांग्रेस पार्टी को गलत, भ्रामक और भटकाने वाली जानकारी दे रहे हैं।
कंपनी ने अंबानी के पत्र के हवाले से कहा है कि रिलायंस को इस डील से जो हजारों करोड़ रुपए का फायदा होने की बात की जा रही है वह कुछ निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा प्रचारित कोरी कल्पना मात्र है। उन्होंने लिखा है, ‘सीधे शब्दों में कहें तो भारत सरकार के साथ कोई करार है ही नहीं।’पत्र में यह भी कहा गया है कि लड़ाकू जेट की आपूर्ति करने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट ने रिलायंस समूह से करार अनुबंध के तहत अपनी आफसेट अनिवार्यता को पूरा करने के लिए किया है। रक्षा आफसेट में विदेशी आपूर्तिकर्ता को उत्पाद के एक निश्चित प्रतिशत का विनिर्माण खरीद करने वाले देश में करना होता है। कई बार यह कार्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिये किया जाता है। उन्होंने कहा है कि रिलायंस डसॉल्ट संयुक्त उपक्रम कोई राफेल जेट विमानों का विनिर्माण नहीं करने जा रहा है। सभी 36 के 36 विमान शत प्रतिशत फ्रांस में ही तैयार किए जाएंगे और उन्हें वहीं से भारत को निर्यात किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा है कि भारत के रक्षा मंत्रालय से रिलायंस समूह को इन विमानों के संबंध में कोई भी ठेका नहीं मिला है। अंबानी ने कहा है कि उनकी कंपनी की भूमिका केवल आफसेट/निर्यात दायित्व तक सीमित है। इसमें भारत इलेक्ट्रानिक्स लि. और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन जैसे सरकरी संगठनों से लेकर 100 से ज्यादा की संख्या में छोटी मझोली कंपनियां शामिल होंगी। इससे भारत की विनिर्माण क्षमता का विस्तार होगा। उन्होंने या दिलाया है कि आफसेट नीति कांग्रेस के नेतृत्ववाली संप्रग सरकार ने ही 2005 में लागू की थी। अनिल अंबानी ने इससे पहले दिसंबर में इस मुद्दे पर गांधी को पहली बार पत्र लिखा था।