मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का नाम लिए बगैर उन पर सोमवार को करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजस्थान के केंद्रीय मंत्री ने ओवर एंबिशियस बनकर जो गेम प्ले किया, उसके लिए उन्हें जनता कभी माफ नहीं करेगी। नए-नए एमपी बने थे। केन्द्र में मंत्री बनने का जल्दी चांस मिल गया, इसलिए जल्दबाजी में पूरा कूद गए। इसलिए टेकऑफ करने के चक्कर में धराशायी हो गए।
मुख्यमंत्री गहलोत जैसलमेर से लौटने के बाद सोमवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए हमारे विधायकों को रक्षाबंधन जैसा त्योहार भी परिजनों के बिना होटल में मनाना पड़ा है। यह व्यथित करने वाला क्षण है, लेकिन लोकतंत्र को बचाने के इस संग्राम में उनके योगदान को पूरा देश देख रहा है। कर्नाटक व मध्यप्रदेश के बाद भाजपा का राजस्थान में चुनी हुई सरकार को टॉपल करने का तीसरा अटैम्प था। उनके पास 73 और हमारे पास 122 हैं, फिर भी सरकार गिराने का खेल खेला गया। भारत सरकार में बैठे हुए नेताओं का यह खेल पूरा मुल्क देख रहा हैं, अल्टीमेटली सच्चाई की जीत होगी।
गहलोत ने कहा कि यह खेल बड़े स्तर पर रचा गया। इसमें कई केन्द्रीय मंत्री शामिल है। राजस्थान के केन्द्रीय मंत्री खुद क्रेडिट सोसायटी के स्कैम में फंसे हैं। छापा तो उन पर पडऩा चाहिए। लेकिन, जिनके नाम, संबंध और रिश्ते हमसे जुड़े हैं, उन पर बेवजह छापे पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना से सीधी लड़ाई राज्य सरकारों ने लड़ी है, ऐसे वक्त में भी चुनी हुई सरकारों को टॉपल करने का षडय़ंत्र किसी भी सूरत में जनता माफ नहीं करेगी। बागी हुए विधायकों के संबंध में उन्होंने कहा कि उनका जमीर उन्हें इजाजत दें तो वे सरकार पर झूठे आरोप लगाते रहे। हमने उनके क्षेत्र में भी खूब काम करवाए हैं। अभी कॉलेज खोले हैं। हमारा फर्ज है कि जनता की भलाई के काम करें। जनता ने क्या कसूर किया। जनता ने उन्हें जिताकर भेजा था विधानसभा में। मुझसे नाइत्तफाकी थी तो जनता का क्या कसूर। आमजन किसी भी सूरत में परेशान नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की जनता में बागी विधायकों के प्रति आक्रोश है। हम जब निकलते हैं तो थड़ी, दुकान, चौराहों पर खड़ी जनता विक्ट्री का साइन करती है, हाथ वेव करती है, जनता समझ रही है कि वास्तव में तमाशा बीजेपी ने बहुत भयंकर किया है।