रांची। पति की लंबी उम्र और सुखद जीवन की कामना को लेकर मनाया जाने वाला सुहागिनों का हरितालिाका तीज व्रत मंगलवार को मनाया गया। सोमवार को व्रत करनेवाली महिलाओं ने नहाय-खाय का रस्म पूरा किया और व्रत का संयत किया। मंगलवार को सुहागिन महिलाओं ने 24 घंटे का अखंड उपवास रखा और भगवान गौरी-शंकर की विधिवत पूजा अर्चना कर हरितालिका तीज व्रत की कथा का श्रवण कर अपने पति की दीघार्यु होने और सुखद जीवन की कामना की। मंगलवार दिन और हस्त नक्षत्र का योग महिलाओं के लिए बेहद खास संयोग लेकर प्रकट हुआ। धर्मशास्त्रों के अनुसार ऐसे शुभ मुहूर्त में तीज व्रत की पूजा करने से कई शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन शुभ नाम का योग भोग कर रहा है, उसके बाद ब्रह्म योग शुरू हो रहा है। तीज पूजा में यह योग खाश मायने रखता है। पर्व के दिन महिलाओं ने बालू का शिवलिंग और पार्वती की प्रतिमा बना कर पंचामृत, सुंगधित तेल, गुलाबजल, गंगा जल, ईत्र, लवंग, इलाइची, पान पत्ता, नारियल, भष्म, चंदन, अबीर, पंचमेवा, बेलपत्र, नैवेद्य, धूप, दीप, शमी आदि पूजन सामग्रियों से विधिवत पूजा की। पूजा में सिंदूर, आलता, बिंदिया आदि सुहाग की सामग्री अवश्य चढ़ायी गयी। पूजा के बाद तीज व्रत का कथा का श्रवण महिलाओं ने सुना ।
क्यों मनायी जाती है हारितालिका तीज
शिव पुराण के अनुसार राजा हिमालय की पुत्री पार्वती ने नारद के निर्देश पर मन ही मन शिव को पति मान लिया था। इधर पार्वती के पिता ने अपनी पुत्री का विवाह भगवान विष्णु के साथ तय किया था। इसकी जानकारी जब पार्वती को मिली तो उन्होंने यह जानकारी अपनी सखियों को दी। फिर सखियां पार्वती को हर कर ले गयीं थी और एक निर्जन वन में छुपा दी थी। सखियों द्वारा पार्वती हर कर ले जाने की घटना के कारण ही इस व्रत का नाम हरितालिका तीज पड़ा। पार्वती ने शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए इसी दिन तीज व्रत किया। उसके फलस्वरूप भगवान शिव, पार्वती को पति रूप में मिले। महादेव ने पार्वती से कहा कि आज से भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को जो भी सौभाग्यवती स्त्री तीज व्रत पर भगवान शिव की पूजा करेंगी और कथा का श्रवण करेंगी, वह सदा सुहागन रहेंगी।