नयी दिल्ली। प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। याचिका में पेपर लीक में शामिल आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्तियों की जांच कर अवैध संपत्ति जब्त करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मंगलवार को अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका पर केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 सितंबर की तारीख तय की गई है।
परिवार की संपत्ति की जांच की भी मांग
याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक और परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी में शामिल आरोपियों की पूरी संपत्ति का आकलन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उनके परिवार के सदस्यों की संपत्ति की भी जांच करने की मांग की गई है, ताकि अपराध से अर्जित धन या अवैध संपत्ति का पता लगाया जा सके।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि जांच के दौरान यदि अवैध संपत्ति या अपराध से अर्जित धन का पता चलता है, तो भ्रष्टाचार निवारण कानून, मनी लॉन्ड्रिंग कानून, बेनामी संपत्ति कानून और ब्लैक मनी कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
सजा लगातार लागू करने की मांग
याचिका में पेपर लीक के दोषियों को मिलने वाली विभिन्न सजाओं को एक साथ लागू करने के बजाय लगातार लागू करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि कठोर और प्रभावी दंड व्यवस्था से पेपर लीक जैसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों से इस मामले में जवाब मांगा है। अब मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।



