नई दिल्ली: बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में छात्रा से छेड़छाड़ के बाद कार्रवाई न करने को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातर बढ़ता ही जा रहा है। इसी बीच मामले पर पीएम ने प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से जवाब तलब किया, तो वहीं मामले की जांच के लिए बनाई गई टीम की रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है, जिसमें विश्वविद्यालय को जिम्मेदार बताया गया है।
दरअसल बीएचयू में छेड़खानी का विरोध करने पर छात्राओं पर लाठीचार्ज की घटना को लेकर वाराणसी के कमिशन्रर की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मामले में बीएचयू प्रशासन दोषी है, रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर समय रहते बीएचयू प्रसाशन का कोई अधिकारी मौके पर पहुंच जाता तो इस घटना को रोका जा सकता था। तो वहीं कमिश्नर की रिपोर्ट में लाठीचार्ज के लिए प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
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कमिश्नर की रिपोर्ट के अनुसार छात्राओं की 3 मांगें जायज थीं जिसमें, पहली मांग अंधेरे रास्तों पर रोशनी की व्यवस्था, दूसरी सीसीटीवी और तीसरी मांग छेड़खानी रोकने के लिए समिति बनाई जानी चाहिए थी। रिपोर्ट के बाद कमिश्नर नितिन गोकर्ण ने बताया कि लड़की के साथ छेड़खानी की घटना हुई थी, इसकी शिकायत करने के बाद जब विश्वविद्यालय की ओर से कोई उचित कदम नहीं उठाया गया तो छात्राओं में आक्रोश बढ़ता गया।
जाने क्या है पूरा मामला
दरअसल बताया जाता है कि विश्वविद्यालय में 21 सितंबर को फाइन आर्ट्स की एक छात्रा से कैंपस में छेड़छाड़ हुई, जिसके बाद छात्रा ने शिकायत की लेकिन इसके बावजूद आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके विरोध में 22 सितंबर को छात्राओं ने विश्वविद्यालय में धरना शुरू कर दिया। इसके बाद 23 सितंबर को कुलपति आवास का घेराव करने जा रही छात्राओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिसके बाद मामले में बवाल और भी बढ़ गया, क्योंकि पुलिस पर आरोप है कि छात्राओं पर भी पुरुष कर्मियों ने लाठीचार्ज किया।
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