रांची। राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को झारखंड विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव को झारखंड विधानसभा में नियुक्ति-प्रोन्नति में बरती गयी अनियमितता की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति विक्रमादित्य आयोग की अनुशंसा को प्रेषित किया है। इस आलोक में समुचित कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है। बताते चलें कि तत्कालीन राज्यपाल सैयद अहमद द्वारा झारखंड विधानसभा में नियुक्ति-प्रोन्नति में बरती गयी अनियमितता की जांच के लिए आयोग का गठन किया गया था। पूर्व में न्यायमूर्ति लोकनाथ प्रसाद को जांच कार्य की जिम्मेदारी दी गयी। श्री प्रसाद के इस्तीफे के बाद न्यायमूर्ति विक्रमादित्य प्रसाद को जांच की जिम्मेदारी प्रदान की गयी। आयोग ने नियुक्ति-प्रोन्नति में बरती गयी अनियमितता के संदर्भ में विस्तृत जांच प्रतिवेदन राज्यपाल को आवश्यक कार्रवाई के लिए समर्पित किया। राज्यपाल ने इस कार्रवाई का निर्देश विधानसभा अध्यक्ष को दिया है।

नामधारी और आलमगीर के समय हुई थी नियुक्ति
झारखंड विधानसभा में पूर्व स्पीकर इंदर सिंह नामधारी के समय अनुसेवक और चालक की नियुक्ति हुई थी। इनके समय में ही सहायक के 150 पदों के लिए विज्ञापन निकला था। इसके लिए लिखित परीक्षा भी हुई थी। परिणाम पूर्व स्पीकर आलमगीर आलम के समय में आया। आलमगीर आलम के समय बड़े पैमाने पर चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों की नियुक्ति हुई थी। मंत्री सरयू राय ने नियुक्ति में अनियमितता को लेकर एक सीडी जारी की थी और इसके बाद पूर्व राज्यपाल सैयद अहमद ने जांच आयोग का गठन किया था। लंबे समय तक इस अनियमितता की जांच हुई। कई बार आयोग का कार्यकाल बढ़ाया गया। लगभग डेढ़ महीने पहले न्यायमूर्ति विक्रमादित्य प्रसाद ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को सौंपी थी।

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