अजय शर्मा
रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास की छवि तेजी से रेस्टलेस सीएम के रूप में उभरी है। देश के गिने-चुने मुख्यमंत्रियों की सूची में झारखंड के सीएम सबसे ऊपर हैं। वजह है उनका काम करने का जुनून। मुख्यमंत्री 16 से 18 घंटे काम करते हैं। बिना रेस्ट लिये राज्य के अलग-अलग जिलों का दौरा करते हैं। मुख्यमंत्री सहज हैं और आम लोगों के लिए उपलब्ध हैं। उनके काम करने के तरीके पर गौर करें तो हैरत में पड़ जायेंगे। सुबह छह से रात 10 बजे तक नॉनस्टॉप काम करते हैं। सीएम सुबह छह बजे के पहले जग जाते हैं। नौ बजे नास्ता करते हैं, इसके पहले राज्य के आला अधिकारियों से बात करते हैं, राज्य के संबंध में जानकारी लेते हैं। इसके बाद शुरू होता है मीटिंग, सभा और समीक्षा का दौर। यह उनके काम करने का ही नतीजा है कि जब वह सीएम बने थे, तो इज आॅफ डूइंग बिजनेस में झारखंड 29वें स्थान पर था। अभी वह अप्रत्याशित ढंग से लंबी छलांग लगा कर चौथे स्थान पर आ गया है। किसी भी राज्य का सीएम बनना गौरव की बात है, लेकिन इस पद पर बैठा व्यक्ति इस कदर राज्यवासियों के लिए चिंतित रहे यह और भी बड़ी बात है। पूर्व में झारखंड की पहचान स्कैम के कारण भी थी। सीएम ने पहले राज्य की इस छवि को धोया और अब इसकी चर्चा विकास और सिर्फ विकास के लिए होती है।
सामने आ रहे कार्यों के परिणाम
रघुवर और उनकी टीम ने राज्य का कायाकल्प करने का जो बीड़ा उठाया है, उसका परिणाम भी सामने आने लगा है। सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने वाला देश का पहला राज्य झारखंड कृषि में सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने वाला पहला राज्य है। महिलाओं को एक रुपये में 50 लाख की संपत्ति की रजिस्ट्री के मामले में भी यह पहला राज्य है। उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन के साथ चूल्हा फ्री और दूसरा सिलेंडर देने वाला भी देश का इकलौता राज्य है। आॅनलाइन रजिस्ट्री और म्यूटेशन करने वाला भी यह पहला राज्य है। पीएम नरेंद्र मोदी के निर्देश पर सीएम ने राज्य के विकास के लिए कई कदम उठाये हैं। कठोर निर्णय लेने के लिए वे जाने जाते हैं। फिर चाहे वह वर्षों से लंबित स्थानीय नीति हो या फिर नये सचिवालय के निर्माण का विवाद। उनके नेतृत्व में लॉ एंड आॅर्डर की स्थिति में तो गजब का सुधार हुआ है। वहीं, नक्सल समस्या समाप्ति की ओर है।
दौरे में जुटे हैं सीएम
इन दिनों मुख्यमंत्री राज्य का दौरा कर रहे हैं। 13 जुलाई को भाजपा के प्रदेश कोर कमेटी की बैठक हुई साथ में कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी थे। उसी शाम भाजपा के विधायकों की भी बैठक हुई। सीएम बैठक में शामिल रहे। अगले दिन 14 जुलाई को ओरमांझी के पांचा में सदस्यता अभियान में शामिल हुए। 15 को 11 बजे से छह बजे तक डीसी-एसपी से राज्य का जायजा लेते रहे। अगले दिन देवघर गये। 19 को दिनभर प्रोजेक्ट भवन में रहे। शाम में राजग विधायक दल की बैठक में शामिल रहे। 22 से 26 जुलाई तक विधानसभा सत्र में रहे। सात अगस्त को प्रदेश भाजपा की बैठक में शामिल हुए। 13 अगस्त को भाजपा कोर कमेटी की बैठक में शामिल हुए। 23 अगस्त को चाईबासा गये। 24 अगस्त को हरमू में बीजेपी की बैठक, 26 और 27 अगस्त को दिल्ली में हुई बैठक में शामिल हुए। 28 अगस्त को हजारीबाग और विष्णुगढ़ में उज्ज्वला दीदी सम्मेलन और भाजपा की बैठक में शामिल हुए। 29 को संथाल, 30 को लोहरदगा गुमला, 31 को पलामू और इटखोरी, दो सितंबर को साहेबगंज, सात सितंबर को पाकुड़, फिर दो दिन जमशेदपुर में मंडल अध्यक्षों के साथ बैठक। आठ सितंबर को फिर पाकुड़ में सभा की। मुख्यमंत्री गरीब परिवार से आते हैं। वे संघर्ष कर इस कुर्सी तक पहुंचे हैं। वह सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक काम करते हैं।
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